बालोद। डौंडी स्थित आदर्श एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्रावास में कक्षा 10वीं के छात्र विनय कुमार रावत की मौत का मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। शुरुआती जांच रिपोर्ट पर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाते हुए इसे अधूरा बताया है। वहीं रैगिंग, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और छात्रावास में नशीले पदार्थों के सेवन जैसे आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। सोमवार को परिजन, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि पहले आदिवासी विकास विभाग पहुंचे और बाद में कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। कलेक्टर से चर्चा और पुलिस के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ, लेकिन अब जांच के नतीजों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
10 सितंबर को हुई थी घटना
ग्राम रीवागहन निवासी विनय कुमार रावत डौंडी स्थित आदर्श एकलव्य आवासीय विद्यालय में कक्षा 10वीं का छात्र था और छात्रावास में रहकर पढ़ाई करता था। 10 सितंबर की सुबह नियमित पीटी के दौरान वह मैदान में नहीं पहुंचा। जब साथी छात्र कमरे में पहुंचे तो वह फांसी के फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई।

जांच रिपोर्ट पर परिवार ने जताया अविश्वास
परिजनों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में आत्महत्या का कारण छात्र की किसी लड़की से बातचीत को बताया गया, जबकि वे इस निष्कर्ष को स्वीकार नहीं करते। उनका दावा है कि विनय के साथ छात्रावास में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही थीं, जिनकी गंभीरता से जांच नहीं की गई। इसी वजह से उन्होंने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
आवेदन में लगाए गए गंभीर आरोप
कलेक्टर को सौंपे गए विस्तृत आवेदन में परिजनों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन के अनुसार विनय को कुछ वरिष्ठ छात्र लगातार रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बना रहे थे। उसके साथ कई बार मारपीट होने का भी आरोप लगाया गया है। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि छात्रावास में कुछ छात्र गांजा, सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते थे तथा इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

चौकीदार की सूचना भी जांच के घेरे में
आवेदन में रात्रि चौकीदार वेद प्रकाश कोरेती का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि उन्होंने छात्रावास में नशीले पदार्थों के सेवन की जानकारी पहले ही प्राचार्य और वार्डन को दी थी। अब यह भी जांच का विषय है कि यदि सूचना दी गई थी तो विद्यालय प्रबंधन ने उस पर क्या कार्रवाई की।
इसी आधार पर परिजनों ने प्राचार्य, वार्डन, पीटीआई शिक्षक, हाउस मास्टर और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
आदिवासी विकास शाखा से कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा विरोध
सोमवार को परिजन, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि पहले आदिवासी विकास शाखा पहुंचे, जहां उन्होंने ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद डौंडीलोहारा विधायक अनिला भेड़िया और गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कलेक्टर स्वयं आकर पूरे मामले पर चर्चा करें। कुछ देर बाद कलेक्टर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उनकी बात सुनी।

कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का भरोसा
कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि आदर्श एकलव्य आवासीय विद्यालय केंद्र सरकार के अधीन संचालित होता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले में तत्काल केंद्र सरकार को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही।

सीसीटीवी जांच की उठी मांग
धरने के दौरान विधायक अनिला भेड़िया ने छात्रावास की सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि यदि फुटेज की निष्पक्ष जांच की जाए तो घटना से पहले की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को कुछ फोटो और वीडियो भी सौंपे, जिनमें छात्रावास परिसर में नशीले पदार्थों के सेवन का दावा किया गया। हालांकि इन दावों की पुष्टि फिलहाल जांच का विषय है।
आदिवासी विभाग ने जारी किया नोटिस
मामले को लेकर आदिवासी विकास विभाग ने संबंधित अधिकारी और विद्यालय प्राचार्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
बालोद पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, सहपाठियों और वरिष्ठ छात्रों के बयान, हॉस्टल स्टाफ से पूछताछ तथा रैगिंग और मारपीट के आरोपों की जांच कर रही है। एसपी के आश्वासन के बाद धरना शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया।
जांच के केंद्र में खड़े ये बड़े सवाल
पूरे मामले में अब कई अहम सवाल जांच के केंद्र में हैं—
* क्या विनय वास्तव में रैगिंग का शिकार था?
* क्या उसके साथ पहले मारपीट हुई थी?
* क्या छात्रावास में नशीले पदार्थों का सेवन हो रहा था?
* क्या विद्यालय प्रबंधन को पहले से शिकायतें मिली थीं?
* चौकीदार द्वारा सूचना दिए जाने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
* क्या सीसीटीवी फुटेज पूरी सच्चाई बताएगी?
* क्या जांच रिपोर्ट में सभी पहलुओं को शामिल किया गया?
* क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय होगी?
अब सबकी नजर जांच पर
विनय कुमार रावत की मौत ने केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि आवासीय विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था, रैगिंग रोकने की व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच किन निष्कर्षों तक पहुंचती है और क्या आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है।














