अर्ली वैरायटी के धान को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका, लेट वैरायटी में बढ़ सकता है कीट व रोग प्रकोप
बालोद। जिले में पिछले 36 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ सीजन में अब तक बेहतर स्थिति में नजर आ रही धान की फसल को कई क्षेत्रों में नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। खेतों में कई जगह धान के पौधे पूरी तरह जमीन पर लोट गए हैं, जिससे किसानों की बंपर पैदावार की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इस वर्ष जिले में पर्याप्त बारिश होने के कारण धान की फसल की बढ़वार अच्छी रही। पिछले कुछ दिनों से मौसम साफ रहने और तेज धूप निकलने से धान में दिखाई दे रहा कीट प्रकोप भी काफी हद तक कम हो गया था। ऐसे में किसान बेहतर उत्पादन को लेकर उत्साहित थे, लेकिन अचानक हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं ने फसल को नुकसान पहुंचाने की स्थिति पैदा कर दी है।
बालियां निकल चुके धान पर सबसे बड़ा खतरा
जिले के कई क्षेत्रों में महामाया, 1010 सहित अन्य अर्ली वैरायटी के धान में बालियां निकल चुकी हैं। ऐसे संवेदनशील समय में तेज बारिश और हवा के कारण धान के पौधे खेतों में गिर गए हैं। किसानों का कहना है कि गिरी हुई फसल में पानी भरने से बालियों के प्रभावित होने, दानों की गुणवत्ता घटने और उत्पादन कम होने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों के अनुसार, धान की फसल के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यदि लगातार नमी बनी रही तो फसल के सड़ने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका और बढ़ सकती है।

लेट वैरायटी में बढ़ सकता है रोग और कीट प्रकोप
बारिश के बाद अब लेट वैरायटी के धान में भी कीट एवं रोग प्रकोप बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। खेतों में लंबे समय तक पानी भरे रहने और लगातार नमी रहने से विभिन्न प्रकार के कीट एवं फफूंदजनित रोग पनप सकते हैं। ऐसे में किसानों को अपनी फसल की लगातार निगरानी करने की जरूरत पड़ रही है।
गर्मी से राहत मिली, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ी
लगातार बारिश से जहां पिछले करीब पखवाड़े से पड़ रही तेज गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली है, वहीं किसानों के लिए यही बारिश चिंता का कारण बन गई है। खेतों में जलभराव और तेज हवाओं के कारण धान के पौधों के गिरने से नुकसान की आशंका गहरा गई है।
किसानों का कहना है कि बारिश थमने के बाद ही खेतों में फसल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं कृषि विभाग से भी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर किसानों को आवश्यक सलाह और फसल बचाने के उपाय उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जा रही है। फिलहाल जिले के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि बारिश थमे और गिरी हुई फसल को संभालने का अवसर मिल सके।













