मटिया(पी) गांव में नाले का पानी आबादी तक पहुंचा, मुनादी कर लोगों को किया गया सतर्क; शहर का ड्रेनेज सिस्टम फेल, रेलवे कॉलोनी में घरों में घुसा पानी
बालोद। पिछले करीब 36 घंटे से रुक-रुककर हो रही मूसलाधार बारिश ने बालोद जिले में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई नदी-नाले उफान पर हैं, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जबकि कुछ गांवों में पानी आबादी तक पहुंचने लगा है। इसी बीच जिले की जीवनदायिनी तांदुला जलाशय भी अपनी अधिकतम क्षमता के बेहद करीब पहुंच गया है और जल संसाधन विभाग के अनुसार यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो शुक्रवार रात तक तांदुला के ओवरफ्लो होने की पूरी संभावना है।

शुक्रवार शाम 5 बजे तक तांदुला जलाशय में 38.20 फीट यानी 98.60 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया। जलाशय को छलकने के लिए अब लगभग 30 इंच पानी की और आवश्यकता है। शाम के समय रपटा क्षेत्र में तेज हवा के साथ पानी छलकता हुआ दिखाई दिया, जिससे लोगों में उत्साह के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

कैचमेंट एरिया से तेज हुई पानी की आवक
तांदुला जलाशय का कैचमेंट एरिया पिछले डेढ़ दिन से लगातार बारिश की चपेट में है। चारामा, डौंडी, मुल्लेगुड़ा सहित आसपास के जंगल क्षेत्रों से बड़े नालों के जरिए भारी मात्रा में पानी जलाशय में पहुंच रहा है। इसी वजह से जलस्तर में लगातार तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जल संसाधन विभाग की टीम लगातार जलस्तर और पानी की आवक पर नजर बनाए हुए है।
ग्रामीण इलाकों में बाढ़ जैसे हालात, मटिया पी गांव में अलर्ट
लगातार बारिश का सबसे गंभीर असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। जिले के मटियापी गांव से गुजरने वाला सेमरिया नाला उफान पर आ गया है और उसके ऊपर से तेज बहाव के साथ पानी बहने लगा है। हालात तब और गंभीर हो गए जब नाले का पानी गांव के भीतर प्रवेश करने लगा।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पूरे गांव में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों से रातभर जलस्तर पर नजर बनाए रखने, नाले के पास नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण गांव में एहतियातन अलर्ट जारी कर दिया गया है।

शहर का ड्रेनेज सिस्टम फिर फेल
बारिश ने बालोद शहर की जल निकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। लगातार पानी गिरने के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया। सबसे अधिक परेशानी रेलवे कॉलोनी में देखने को मिली, जहां रेलवे क्वार्टरों के भीतर तक पानी घुस गया। लोगों को घरों से पानी निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई सड़कों पर पानी भरने से आवागमन भी प्रभावित रहा।
किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश अब किसानों के लिए भी चिंता का कारण बनने लगी है। जिले के अधिकांश खेतों में धान की फसल में बालियां निकल चुकी हैं। ऐसे समय लगातार तेज बारिश और संभावित आंधी-तूफान के कारण फसल गिरने का खतरा बढ़ गया है। मानसून की शुरुआती अच्छी बारिश से किसानों में खुशी थी, लेकिन अब लगातार हो रही बारिश और चक्रवाती असर से फसल को नुकसान की आशंका बढ़ती जा रही है।

एक साल बाद फिर दिख सकता है तांदुला का मनमोहक दृश्य
तांदुला जलाशय के लगभग भर जाने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों में भी उत्साह है। यदि जलाशय ओवरफ्लो होता है तो करीब एक साल बाद लोगों को तांदुला के रपटा से पानी छलकने का मनमोहक दृश्य देखने मिलेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यह नजारा देखने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती होगी।
खरखरा भी छलकने की दहलीज पर
केवल तांदुला ही नहीं, खरखरा जलाशय भी अपनी पूरी क्षमता के बेहद करीब पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह तक यहां 29.70 फीट यानी 98.51 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया। इसे भी छलकने के लिए लगभग 30 इंच पानी की आवश्यकता है। यदि पानी की आवक इसी तरह बनी रही तो खरखरा भी जल्द ओवरफ्लो हो सकता है।
गोंदली और मटिया मोती में भी बढ़ा जलभराव
जिले के अन्य जलाशयों में भी बारिश का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गोंदली जलाशय में 30.90 फीट यानी 85.73 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है, जबकि मटिया मोती जलाशय में 6.28 मीटर पानी भर चुका है। लगातार बारिश जारी रहने पर इन जलाशयों का जलस्तर भी और बढ़ सकता है।
नदी-नाले उफान पर, जनजीवन प्रभावित
पिछले 36 घंटे से लगातार हो रही बारिश के कारण जिले के अधिकांश नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। कई स्थानों पर रपटों के ऊपर से पानी बह रहा है। खेत-खलिहान पानी से लबालब हैं और ग्रामीण मार्गों पर आवागमन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
जिले के प्रमुख जलाशयों की स्थिति
| जलाशय | वर्तमान जलस्तर |
|---|---|
| तांदुला | 38.20 फीट (98.60%) |
| खरखरा | 29.70 फीट (98.51%) |
| गोंदली | 30.90 फीट (85.73%) |
| मटिया मोती | 6.28 मीटर |
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से नदी-नालों, रपटों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने, बच्चों को पानी के पास नहीं जाने देने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
लगातार बढ़ते जलस्तर और जलाशयों के लगभग भर जाने से अब पूरे जिले की नजर तांदुला और खरखरा पर टिकी हुई है। यदि बारिश का यही दौर जारी रहा तो बालोद जिले में एक ओर जहां तांदुला के छलकने का ऐतिहासिक दृश्य देखने मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने बाढ़ जैसे हालात से निपटने की चुनौती भी और बढ़ सकती है।














