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पटाखा बाजार में नियमों की अनदेखी पर सवाल, खबर से बौखलाए कुछ लोग पत्रकारों को दे रहे धमकी!

प्रशासन ने खुद जारी किए 3 मीटर की दूरी और अग्निरोधक टिन शेड के निर्देश, लेकिन मैदान में इनका पालन होता नजर नहीं आ रहा; खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाने का आरोप, स्थानीय पत्रकारों ने उठाई आवंटन प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग

बालोद। सरदार पटेल मैदान में संचालित पटाखा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अब तूल पकड़ने लगे हैं। एक ओर जिला प्रशासन आम नागरिकों की सुरक्षा का हवाला देते हुए पटाखा दुकानों के संचालन के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं निर्देशों के पालन को लेकर मौके की स्थिति सवालों के घेरे में है। प्रशासन द्वारा 8 नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि पटाखा दुकानों के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी अनिवार्य होगी और दुकानों का निर्माण ज्वलनशील सामग्री के बजाय अग्निरोधक सामग्री से बने टिन शेड में किया जाना होगा। लेकिन सरदार पटेल मैदान में संचालित दुकानों की तस्वीरें इन सुरक्षा निर्देशों के वास्तविक पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

प्रशासन का आदेश स्पष्ट, मैदान में नियमों की अनदेखी क्यों?

जिला प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कलेक्टर के निर्देशानुसार दीपावली के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा और पटाखों की बिक्री को व्यवस्थित बनाने के लिए सरदार पटेल मैदान में अस्थायी दुकानों के संचालन की अनुमति दी गई है। अनुविभागीय दंडाधिकारी बालोद द्वारा 6 नवंबर को पटाखा व्यापारी संघ के आवेदन पर संबंधित विभागों से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर निर्धारित शर्तों के साथ स्थल आवंटन की अनुमति दी गई।

प्रशासन ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दुकानों के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी रखनी होगी। दुकानें ज्वलनशील सामग्री के बजाय अग्निरोधक सामग्री से बने टिन शेड में ही संचालित होंगी। तेल एवं गैस के लैंप तथा खुली बिजली की बत्तियों का उपयोग भी प्रतिबंधित रहेगा।

लेकिन मैदान में दुकानों की एक लंबी कतार और उनके निर्माण में उपयोग की गई सामग्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दुकानों के बीच निर्धारित दूरी का पालन होता नजर नहीं आ रहा है, वहीं अस्थायी दुकानों के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री भी प्रशासन के निर्देशों के अनुरूप है या नहीं, यह जांच का विषय है। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित विभागों से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर अनुमति देने के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

3 मीटर की दूरी और अग्निरोधक टिन शेड के निर्देश पर सबसे बड़ा सवाल

पटाखा दुकानों में आगजनी की आशंका को देखते हुए दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी और अग्निरोधक निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने भी इन्हीं बिंदुओं को अपने दिशा-निर्देशों में प्राथमिकता दी है। इसके बावजूद यदि दुकानें एक-दूसरे के बेहद करीब संचालित हो रही हैं और निर्माण में ज्वलनशील सामग्री का उपयोग किया गया है, तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

इतना ही नहीं, प्रशासन ने प्रत्येक दुकान में 5 किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र, पानी से भरी बाल्टियां और सूखी रेत रखने के निर्देश भी दिए हैं। अग्निशमन वाहन और एंबुलेंस की आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रखना अनिवार्य किया गया है। दुकानों के सामने पार्किंग और आपातकालीन रास्तों की स्थिति को लेकर भी निरीक्षण की आवश्यकता है।

खबर प्रकाशित हुई तो पत्रकारों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाने का आरोप

पटाखा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद अब इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। जानकारी के अनुसार, पटाखा कारोबार से जुड़े कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर खबर प्रकाशित करने वाले समाचार पत्रों और उनके प्रतिनिधियों के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां एवं पोस्ट प्रसारित की जा रही हैं। इससे स्थानीय पत्रकारों में नाराजगी है।

पत्रकारों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर संचालित व्यवसाय में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने पर सवाल उठाना और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराना पत्रकारिता की जिम्मेदारी है। किसी खबर से असहमति होने पर तथ्यात्मक जवाब दिया जा सकता है, लेकिन सवाल उठाने वाले पत्रकारों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाना उचित नहीं है।

पत्रकारों ने उठाई आवंटन प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों द्वारा जिला प्रशासन से पटाखा दुकानों के लिए सरदार पटेल मैदान के चयन, अस्थायी स्थल आवंटन की प्रक्रिया तथा संबंधित विभागों द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण प्रतिवेदनों की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का मौके पर निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो निरस्त हो सकती है अनुमति

गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने अपनी 8 नवंबर की विज्ञप्ति में स्वयं स्पष्ट किया है कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन होने पर अस्थायी अनुमति निरस्त की जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित आयोजक एवं दुकानदार के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई का भी प्रावधान बताया गया है। दुर्घटना अथवा किसी प्रकार की क्षति की स्थिति में संबंधित आवेदक एवं आयोजक की जिम्मेदारी तय करने की बात भी कही गई है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन अपने ही जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए मौके पर दोबारा जांच कराएगा? क्या दुकानों के बीच निर्धारित दूरी, निर्माण सामग्री और अग्निशमन व्यवस्था का वास्तविक परीक्षण होगा? और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो क्या अनुमति निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी की जाएगी?

मुद्दा पटाखा कारोबार का विरोध करने का नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। जब प्रशासन ने खुद सुरक्षा के नियम तय किए हैं, तो उनका पालन कराना भी प्रशासन की ही जिम्मेदारी है। आखिर आदेश जारी करने तक ही प्रशासन की जिम्मेदारी सीमित रहेगी या जमीन पर भी इन नियमों का पालन सुनिश्चित होगा?

 

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