नई दिल्ली। बाजार में बिकने वाले एनालॉग (दूध से प्राप्त नहीं होने वाले) उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बेचने पर रोक लगाने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने बड़ा कदम उठाया है। एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर निषेध एवं प्रतिबंध) संशोधन विनियम, 2026 का मसौदा जारी करते हुए प्रस्ताव रखा है कि केवल दूध से प्राप्त उत्पादों को ही “पनीर” के रूप में प्रदर्शित और विपणन किया जा सके।
प्राधिकरण का कहना है कि कई उत्पाद ऐसे हैं जो डेयरी उत्पादों जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन उनका निर्माण दूध से नहीं होता। ऐसे उत्पादों पर “पनीर” शब्द का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इसी भ्रामक नामकरण और विपणन पर रोक लगाना है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
लाइसेंस प्राप्त एनालॉग उत्पादों पर भी लागू होगा नियम
एफएसएसएआई ने प्रस्तावित संशोधन में 2011 के मौजूदा विनियमों के विनियम 2.1.1 के तहत नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत “डेयरी संदर्भ में एनालॉग” श्रेणी में पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत उत्पाद भी अपने नाम, लेबल या प्रचार सामग्री में “पनीर” शब्द का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
इस बदलाव से उन उत्पादों की पहचान स्पष्ट होगी जो वास्तव में दूध से बने हैं और जो अन्य अवयवों से तैयार किए गए हैं।
उपभोक्ताओं को मिलेगा सही विकल्प चुनने का अवसर
एफएसएसएआई के अनुसार, संशोधन का मुख्य उद्देश्य खाद्य उत्पादों के नामकरण और प्रस्तुतीकरण को उनकी वास्तविक संरचना के अनुरूप बनाना है। इससे उपभोक्ता किसी भी उत्पाद को खरीदते समय यह आसानी से समझ सकेंगे कि वह दूध से निर्मित है या नहीं, जिससे वे अधिक जागरूक और सूचित निर्णय ले सकेंगे।
60 दिन तक मांगे गए सुझाव
यह फिलहाल मसौदा अधिसूचना है, इसलिए एफएसएसएआई ने उद्योग जगत, संबंधित हितधारकों और आम जनता से 60 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। सुझाव एफएसएसएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एफडीए भवन, कोटला रोड, नई दिल्ली-110002 को भेजे जा सकते हैं या अधिसूचना में दिए गए ईमेल के माध्यम से भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
एफएसएसएआई ने यह मसौदा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से जारी किया है। उल्लेखनीय है कि मूल खाद्य सुरक्षा एवं मानक (बिक्री पर निषेध एवं प्रतिबंध) विनियम वर्ष 2011 में अधिसूचित किए गए थे और समय-समय पर इनमें संशोधन किए जाते रहे हैं।













