
धरना को संबोधित करते हुए संघ पदाधिकारियों ने कहा कि पटवारी राजस्व प्रशासन की रीढ़ हैं और शासन की लगभग हर महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में अग्रिम पंक्ति में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। भूमि अभिलेखों के संधारण, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, फसल गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, प्राकृतिक आपदा सर्वेक्षण, चुनावी कार्य सहित अनेक प्रशासनिक दायित्व पटवारियों के माध्यम से ही पूरे होते हैं। इसके बावजूद वर्षों से पदोन्नति, वेतन विसंगति और सेवा सुविधाओं से जुड़ी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।संघ ने कहा कि कई कर्मचारी पूरी सेवा अवधि एक ही पद पर कार्य करने को मजबूर हैं, जबकि लगातार नई जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और सांकेतिक है, लेकिन यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर लंबित मांगों का समाधान नहीं किया तो प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशानुसार आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

धरना-प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष लोकेश साहू, उपाध्यक्ष जमील खान, प्रांतीय प्रचार मंत्री यशवंत देवांगन, सचिव सुरेश सिन्हा, कोषाध्यक्ष अविनाश यादव, सेवानिवृत्त पटवारी खम्म्हन लाल सोनबोईर, सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक चुन्नीलाल साहू सहित जिलेभर के सभी तहसीलों के तहसील अध्यक्ष, जिला कार्यकारिणी के सदस्य एवं बड़ी संख्या में पटवारी उपस्थित रहे।
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने, राजस्व निरीक्षक के रिक्त पदों पर केवल पटवारियों से पदोन्नति देने, भर्ती नियम में संशोधन कर 50 प्रतिशत वरिष्ठता एवं 50 प्रतिशत विभागीय परीक्षा के आधार पर पदोन्नति का प्रावधान लागू करने, वेतन विसंगति का शीघ्र निराकरण करने तथा प्रदेशभर में वेतन निर्धारण के लिए एकरूप दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।




















