जल-जंगल के संघर्ष और छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन के अनछुए अध्यायों को सामने लाती है पुस्तक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन में जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए हुए संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शनिवार शाम शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय आशीष सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘सत्याग्रह’ का विमोचन किया। कार्यक्रम का आयोजन हरि ठाकुर स्मारक संस्थान, रायपुर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने की। इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा, साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष शशांक शर्मा, पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू, साहित्यकार वीरेन्द्र बहादुर, लेखक के पुत्र उपमन्यु सिंह और अभिमन्यु सिंह सहित अनेक साहित्यकार, इतिहासकार एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ के जनसंघर्षों का ऐतिहासिक दस्तावेज
पुस्तक का विमोचन करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘सत्याग्रह’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम और जनआंदोलनों का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है। इसमें ब्रिटिश शासनकाल के दौरान जल-जंगल के अधिकारों की रक्षा के लिए हुए संघर्षों को तथ्यात्मक और शोधपरक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों से लेकर राजनांदगांव और धमतरी के ऐतिहासिक कंडेल नहर सत्याग्रह तक की घटनाओं को विस्तार से सामने लाती है। यह वही आंदोलन था, जिसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को वर्ष 1920 में धमतरी आने के लिए प्रेरित किया। गांधी का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
भूले-बिसरे सेनानियों को दिलाती है पहचान
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम के उन नायकों के योगदान को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है, जिनका इतिहास में अपेक्षित उल्लेख नहीं हो सका। विशेष रूप से राजनांदगांव जिले के शहीद रामाधीन गोंड, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनके योगदान का विस्तृत वर्णन पुस्तक की विशेषता है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव शहर में आज भी उनके सम्मान में रामाधीन मार्ग नामांकित है।
उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी त्यागमूर्ति प्यारेलाल सिंह तथा प्रख्यात इतिहासकार एवं साहित्यकार हरि ठाकुर के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि ऐसी पुस्तकों के माध्यम से प्रदेश का गौरवशाली इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचेगा।

शताब्दी वर्ष में ऐतिहासिक महत्व की पुस्तक
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि जल-जंगल के अधिकारों के लिए हुए संघर्षों के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इस पुस्तक का प्रकाशन अत्यंत सार्थक है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय आशीष सिंह ने गहन अध्ययन और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ के जनआंदोलनों को पुस्तक में समाहित किया है।
उन्होंने बताया कि पुस्तक में कंडेल नहर सत्याग्रह, नत्थूजी जगताप, नारायण राव मेघावाले, शहीद रामाधीन गोंड तथा पंडित सुंदरलाल शर्मा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का विस्तृत और प्रमाणिक वर्णन किया गया है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए हरि ठाकुर स्मारक संस्थान को बधाई देते हुए इसे प्रदेश के इतिहास संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास बताया।
इतिहास संरक्षण पर वक्ताओं ने दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा साहित्यकार वीरेन्द्र बहादुर ने भी कहा कि इतिहास और जनसंघर्षों पर आधारित साहित्य का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं होतीं, बल्कि समाज को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने का कार्य करती हैं।
नई पीढ़ी के लिए इतिहास को समझने का माध्यम
आज जब इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के क्षेत्रीय आयामों पर गंभीर शोध की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ऐसे समय में ‘सत्याग्रह’ जैसी पुस्तकें विशेष महत्व रखती हैं। यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को केवल बड़े नेताओं के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के गांवों, जंगलों और आम जनमानस के संघर्षों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करती है।
जल-जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार की लड़ाई आज भी विभिन्न रूपों में प्रासंगिक है। ऐसे में यह पुस्तक न केवल इतिहास का पुनर्पाठ कराती है, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को यह भी बताती है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक संघर्ष का परिणाम नहीं थी, बल्कि स्थानीय समाज, किसानों, आदिवासियों और सामान्य नागरिकों के लंबे जनआंदोलनों की देन भी थी। यही कारण है कि ‘सत्याग्रह’ को छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखा जा रहा है।




















