अर्जुन्दा की जर्जर सड़क से शुरू हुआ विवाद राजनीतिक टकराव में बदला, विधायक के खिलाफ पुतला दहन; भाजपा ने कहा- लोकतंत्र में धमकी स्वीकार नहीं
बालोद। गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के अर्जुन्दा में कॉलेज मार्ग की जर्जर सड़क को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट अब जिले की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। भाजपा युवा मोर्चा अर्जुन्दा मंडल अध्यक्ष नवीन राजपूत द्वारा सड़क की बदहाली को लेकर सोशल मीडिया पर क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह निषाद से सवाल पूछने और इस्तीफे की मांग करने के बाद कथित रूप से फोन पर धमकी दिए जाने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। कथित ऑडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को अर्जुन्दा में विधायक का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया और मामले में कार्रवाई की मांग की गई।

भाजयुमो मंडल अध्यक्ष नवीन राजपूत का आरोप है कि सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विधायक ने उन्हें फोन कर कथित रूप से धमकी भरे लहजे में कहा कि “मैं अपनी औकात पर आ जाऊंगा तो तुम्हें जमीन पर चलने लायक नहीं छोड़ूंगा।” कथित बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता की समस्या उठाने वाले कार्यकर्ता को इस तरह धमकाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
भाजयुमो का प्रदर्शन, पुतला दहन और कार्रवाई की मांग
शनिवार को भाजयुमो और भाजपा कार्यकर्ताओं ने अर्जुन्दा में विधायक कुंवर सिंह निषाद का पुतला दहन करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि यदि जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सवाल पूछने वालों को धमकाएंगे तो भाजपा इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी। प्रदर्शन में जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख, बिलासपुर संभाग सहप्रभारी एवं पूर्व जिला पंचायत सभापति अभिषेक शुक्ला, भाजयुमो जिलाध्यक्ष गुलशन साहू, भाजपा मंडल अध्यक्ष विश्वास गुप्ता, भाजयुमो मंडल अध्यक्ष नवीन राजपूत सहित बड़ी संख्या में भाजपा एवं भाजयुमो कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पूर्व विधायक वीरेन्द्र साहू बोले- जनप्रतिनिधि को भाषा और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए
गुंडरदेही के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेन्द्र साहू ने भी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक कुंवर सिंह निषाद के कथित बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता और कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है तथा जनप्रतिनिधियों को आलोचना का जवाब विकास कार्यों और तथ्यों से देना चाहिए, न कि कथित रूप से धमकी भरी भाषा से।
वीरेन्द्र साहू ने कहा कि एक विधायक संवैधानिक पद पर होता है, इसलिए उसे अपने पद की गरिमा, भाषा की मर्यादा और शब्दों के चयन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि वायरल ऑडियो में कही गई बातें सही हैं तो यह जनप्रतिनिधि की गरिमा के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। लोकतंत्र में संवाद होना चाहिए, डर और धमकी नहीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता विकास चाहती है, विवाद नहीं, इसलिए सरकार और जनप्रतिनिधियों को सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
अभिषेक शुक्ला का हमला
भाजपा के बिलासपुर संभाग सहप्रभारी एवं पूर्व जिला पंचायत सभापति अभिषेक शुक्ला ने आरोप लगाया कि विधायक अपने गृह क्षेत्र अर्जुन्दा की बदहाल सड़कों का जवाब देने के बजाय एक युवा कार्यकर्ता को कथित रूप से धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता नवीन राजपूत के साथ मजबूती से खड़ा है और यदि किसी कार्यकर्ता के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो भाजपा चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने विधायक के विकास संबंधी दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।
विधायक ने आरोपों को किया खारिज
इधर विधायक कुंवर सिंह निषाद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि संबंधित सड़क की स्वीकृति वर्ष 2023 में हो चुकी थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद वर्तमान सरकार ने उसे निरस्त कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सड़क निर्माण के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।
धमकी के आरोपों पर विधायक का कहना है कि नवीन राजपूत से उनके पुराने पारिवारिक और आत्मीय संबंध हैं तथा उन्होंने केवल सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आग्रह किया था। उनके अनुसार भाजपा इस पूरे मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है। विधायक ने यह भी कहा कि यदि सड़क निर्माण के लिए आंदोलन करना पड़े तो वे स्वयं आंदोलन करने को तैयार हैं।

अब कांग्रेस भी रखेगी अपना पक्ष
इस घटनाक्रम के बाद मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा जहां लगातार विधायक पर हमलावर है, वहीं जिला कांग्रेस कमेटी भी विधायक के समर्थन में सामने आने की तैयारी में है। मामले को लेकर आज कांग्रेस द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है, जिसमें पार्टी पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखेगी और भाजपा के आरोपों का जवाब देगी।
सवाल बरकरार…
अर्जुन्दा की जर्जर सड़क से शुरू हुआ विवाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई में बदल चुका है। कथित ऑडियो, आरोप-प्रत्यारोप, प्रदर्शन, पुतला दहन और अब कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सियासत और तेज होने के संकेत हैं। क्या यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या कानूनी मोड़ लेगा? क्या दोनों दलों की राजनीतिक जंग के बीच अर्जुन्दा की जर्जर सड़क का समाधान निकल पाएगा, या फिर जनता का मूल मुद्दा एक बार फिर राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा?




















