राजनांदगांव रोड चौड़ीकरण की खुली पोल: कुछ ही दिनों में धंसी चेकर टाइल्स, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
बालोद। शहर के राजनांदगांव रोड पर हाल ही में पूर्ण किए गए सड़क चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से किए गए इस निर्माण कार्य में सड़क किनारे पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बिछाई गई चेकर टाइल्स कार्य पूरा होने के कुछ ही दिनों के भीतर कई स्थानों पर धंस गई हैं। इससे न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है, बल्कि विभागीय निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था भी कटघरे में आ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सड़क के दोनों ओर लगभग पांच इंच मोटाई की चेकर टाइल्स बिछाई गई थीं। लेकिन टाइल्स के नीचे की सतह बैठ जाने के कारण कई जगहों पर टाइल्स धंस गई हैं। इससे पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है।

बेस लेयर की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप किया गया होता तो इतनी कम अवधि में टाइल्स धंसने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का आरोप है कि टाइल्स बिछाने से पहले आधार सतह (बेस लेयर) को पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं किया गया। यही कारण है कि मिट्टी बैठने के साथ ही ऊपर लगी टाइल्स भी धंसने लगी हैं।
नागरिकों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, ऐसे में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तथा तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए था।
शुरुआत से ही उठते रहे थे सवाल
इस सड़क निर्माण परियोजना को लेकर शुरुआत से ही विवाद और शिकायतों का सिलसिला जारी रहा। निर्माण कार्य प्रारंभ होने के बाद स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों ने कई बार सड़क निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों की अनदेखी तथा कथित गुणवत्ताहीन कार्य को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई थीं।
निर्माण कार्य के दौरान सड़क की चौड़ाई, साइड एजिंग लाइन, फिनिशिंग तथा अन्य तकनीकी खामियों को लेकर भी लगातार सवाल उठाए गए। बावजूद इसके शिकायतों का कोई ठोस असर दिखाई नहीं दिया और अधिकांश आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
ट्रायल से पहले ही कर दिया गया लोकार्पण
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण पूरी तरह पूर्ण होने और समुचित परीक्षण (ट्रायल) से पहले ही इसका लोकार्पण कर दिया गया। जबकि उस समय भी कई कार्य अधूरे थे और विभिन्न तकनीकी कमियों की ओर लोगों ने ध्यान आकर्षित कराया था। इसके बावजूद संबंधित विभाग ने निर्माण कार्य को पूर्ण मानते हुए ठेकेदार को राहत दे दी।
अब कुछ ही दिनों में चेकर टाइल्स धंसने की घटनाओं ने उन सभी आशंकाओं को सही साबित कर दिया है, जिन्हें निर्माण अवधि के दौरान लगातार उठाया जा रहा था।
राहगीरों के लिए बढ़ा खतरा
धंसी हुई टाइल्स केवल निर्माण गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठा रही हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गई हैं। असमान सतह के कारण बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांगजनों के गिरने और चोटिल होने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई गंभीर हादसा भी हो सकता है।
जांच और जवाबदेही की मांग
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग, जिला प्रशासन एवं जिम्मेदार अधिकारियों से पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में लापरवाही अथवा गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही धंसे हुए हिस्सों का पुनर्निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप शीघ्र कराया जाए, ताकि आम लोगों को सुरक्षित और टिकाऊ आधारभूत सुविधा मिल सके।




















