‘एक पेड़ महतारी के नाम’ बना जनभावना का महाअभियान, ढाई लाख से अधिक पौधों के साथ जिले ने लिखा पर्यावरण संरक्षण का नया अध्याय
बालोद। कभी-कभी इतिहास किसी बड़े आंदोलन या राजनीतिक घटना से नहीं, बल्कि लाखों हाथों द्वारा एक साथ किए गए छोटे-छोटे संकल्पों से लिखा जाता है। 30 जुलाई का दिन बालोद जिले के लिए कुछ ऐसा ही ऐतिहासिक दिन बन गया, जब जिले के गांवों से लेकर शहरों तक, खेतों से लेकर स्कूल परिसरों तक और घरों की बाड़ियों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक एक साथ पौधे रोपे गए। यह केवल वृक्षारोपण का सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रकृति, मातृत्व और भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का ऐसा उत्सव था, जिसने पूरे जिले को हरियाली के एक सूत्र में बांध दिया।

जिले में आयोजित ‘एक पेड़ महतारी के नाम’ अभियान के अंतर्गत ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और जनभागीदारी का ऐसा उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण तब सबसे प्रभावी होता है, जब वह सरकारी योजना न रहकर समाज का संस्कार बन जाए।

जब अभियान बना जनआंदोलन
बालोद की विशेषता यही रही कि इस अभियान का केंद्र केवल प्रशासन नहीं था। महतारी वंदन योजना की लाखों हितग्राही महिलाओं, किसानों, छात्र-छात्राओं, बिहान समूहों, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व मानकर अपनाया। परिणामस्वरूप यह अभियान किसी एक मंच या एक समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले में एक साथ फैलती हरियाली की ऐसी लहर बन गया, जिसने जनसहभागिता की नई मिसाल कायम कर दी।
हर लगाए गए पौधे के पीछे केवल एक गड्ढा और एक पौधा नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, सुरक्षित जल और संतुलित पर्यावरण का एक मौन संकल्प भी था।

प्रशासन ने दिया दिशा, समाज ने दिया विस्तार
जिला मुख्यालय स्थित पर्यावरण पार्क में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर तथा नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पिछले वर्ष लगाए गए अधिकांश पौधों के सुरक्षित रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा, जब हर पौधे को एक परिवार की तरह संरक्षण मिलेगा।

हर गांव में हरियाली का संदेश
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता रही। डौंडी विकासखंड के ग्राम पथराटोला से लेकर गुरूर विकासखंड के दर्जनों गांवों तक हजारों महिलाओं और ग्रामीणों ने पौधरोपण कर इस अभियान को जनउत्सव का स्वरूप दिया। गुरूर विकासखंड में विकसित भारत-जीरामजी, बिहान और अन्य समूहों से जुड़ी 34 हजार से अधिक महिलाओं ने 77 ग्राम पंचायतों में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
महिलाओं ने केवल पौधे नहीं लगाए, बल्कि उनकी देखभाल का संकल्प भी लिया। यही संकल्प इस अभियान को एक दिन के कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनाता है।

मातृत्व और प्रकृति का अद्भुत संगम
इस अभियान की सबसे भावनात्मक विशेषता इसका नाम रहा—‘एक पेड़ महतारी के नाम’। भारतीय संस्कृति में मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन को पोषित करने वाली शक्ति मानी जाती है। वृक्ष भी उसी तरह धरती को जीवन देते हैं—छाया, प्राणवायु, फल, जल संरक्षण और जैव विविधता के माध्यम से।
जब हजारों महिलाओं ने अपनी मां के नाम पर पौधे लगाए, तब यह अभियान प्रशासनिक औपचारिकता से आगे बढ़कर भावनात्मक और सांस्कृतिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दिया। प्रकृति और मातृत्व के इस प्रतीकात्मक संगम ने अभियान को अलग पहचान दी।
हरित भविष्य की ओर मजबूत कदम
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, घटते भूजल स्तर, बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में यदि कोई जिला केवल पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा करने तक सीमित न रहकर समाज को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास करता है, तो यह पहल दूरगामी महत्व रखती है।
बालोद का यह अभियान इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि इसमें प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज तीनों समान भागीदार बने। यही साझेदारी किसी भी पर्यावरणीय प्रयास की वास्तविक शक्ति होती है।

सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, जिम्मेदारी भी
ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण निश्चित रूप से एक उपलब्धि है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता आने वाले वर्षों में तय होगी, जब यही पौधे विशाल वृक्ष बनकर जिले की जलवायु, जैव विविधता और पर्यावरण को नई ऊर्जा देंगे। वृक्षारोपण का महत्व पौधे लगाने से कहीं अधिक उसके संरक्षण में निहित है।
यदि बालोद का हर नागरिक इस अभियान के मूल संदेश को जीवन का हिस्सा बना लेता है, तो यह हरित पहल केवल एक दिन की खबर नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में जिले की नई पहचान बन जाएगी। शायद यही इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है—हर हाथ में पौधा और हर मन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव।




















