35.10 फीट पहुंचा जलस्तर, 38.50 फीट है कुल क्षमता; लगातार बारिश से बढ़ रही पानी की आवक, ओवरफ्लो की उम्मीद में जुटे पर्यटक
बालोद। जिले सहित तांदुला जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर अब जिले के प्रमुख जलस्रोत तांदुला जलाशय पर साफ दिखाई देने लगा है। दुर्ग संभाग के सबसे बड़े और बालोद, दुर्ग व बेमेतरा जिले के लिए महत्वपूर्ण तांदुला जलाशय इस सीजन रिकॉर्ड जलभराव की ओर बढ़ रहा है। रविवार को जलाशय का जलस्तर 35.10 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी कुल जलभराव क्षमता 38.50 फीट है। इस लिहाज से जलाशय के ओवरफ्लो होने में अब महज 3.40 फीट पानी की जरूरत शेष है।
कैचमेंट क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के चलते तांदुला जलाशय में पानी की आवक बनी हुई है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने सिंचाई विभाग के साथ क्षेत्रवासियों की उम्मीद भी बढ़ा दी है। विभाग का मानना है कि यदि आगामी दिनों में बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा और कैचमेंट क्षेत्र से पर्याप्त पानी की आवक बनी रही, तो इस सीजन तांदुला जलाशय के छलकने की संभावना बन सकती है।
ओवरफ्लो के इंतजार में बढ़ी पर्यटकों की आवाजाही
जलाशय में बढ़ते जलस्तर के साथ तांदुला का प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। जलाशय को लबालब भरता देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। पानी से भरे जलाशय और आसपास के हरियाली भरे प्राकृतिक नजारे को लोग मोबाइल फोन और कैमरों में कैद कर रहे हैं। अब जलस्तर 35 फीट के पार पहुंचने के बाद लोगों की नजरें तांदुला के ओवरफ्लो होने पर टिक गई हैं। यदि जलाशय छलकता है तो यह क्षेत्र में इस सीजन का प्रमुख आकर्षण बन सकता है।

गोंदली जलाशय भी लबालब
तांदुला के साथ जिले के अन्य जलाशयों में भी बारिश के कारण पानी की आवक बढ़ी है। गोंदली जलाशय में 30.40 फीट जलभराव दर्ज किया गया है। कैचमेंट क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने के कारण जलाशयों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे सिंचाई और जलस्रोतों की स्थिति को लेकर भी राहत की उम्मीद बढ़ी है।
आगामी बारिश तय करेगी छलकने की तस्वीर
तांदुला जलाशय की कुल क्षमता 38.50 फीट है और वर्तमान जलस्तर 35.10 फीट पहुंच चुका है। यानी जलाशय अपनी अधिकतम क्षमता के काफी करीब है। हालांकि ओवरफ्लो के लिए अभी 3.40 फीट और पानी की जरूरत है। ऐसे में आगामी दिनों में होने वाली बारिश और कैचमेंट क्षेत्र से आने वाले पानी की मात्रा ही तय करेगी कि इस वर्ष तांदुला जलाशय कब छलकेगा। फिलहाल सिंचाई विभाग और क्षेत्र के लोगों की निगाहें आसमान पर हैं और हर अच्छी बारिश के साथ तांदुला के छलकने की उम्मीद और मजबूत होती जा रही है।













