तांदुला जलाशय का जलस्तर 36 घंटे में साढ़े चार फीट बढ़ा, ओवरफ्लो से अब महज साढ़े आठ फीट दूर; किसानों में बढ़ी उम्मीद
बालोद। जिले में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही झमाझम बारिश का असर अब प्रमुख जलाशयों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। लगातार हो रही बारिश और कैचमेंट एरिया में बेहतर वर्षा के कारण तीन जिलों की जीवनदायिनी तांदुला जलाशय सहित जिले के सभी प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक लगातार बनी हुई है। जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने से किसानों के साथ-साथ सिंचाई विभाग भी उत्साहित है।
सिंचाई विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम लगभग 5:30 बजे तांदुला जलाशय का जलस्तर 30 फीट दर्ज किया गया। जलाशय की पूर्ण जलभराव क्षमता 38.50 फीट है। यानी अब तांदुला जलाशय के छलकने के लिए केवल 8.50 फीट पानी की आवश्यकता शेष है। यदि आगामी दिनों में कैचमेंट क्षेत्र में इसी तरह बारिश जारी रही तो इस वर्ष तांदुला जलाशय के ओवरफ्लो होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
महज 36 घंटे में साढ़े चार फीट बढ़ा जलस्तर
तांदुला जलाशय में जलस्तर बढ़ने की रफ्तार इस बार काफी तेज रही है। 29 जुलाई की सुबह 6 बजे जलाशय का जलस्तर 25.50 फीट था, जो लगातार बारिश और नदी-नालों से हो रही भारी पानी की आवक के कारण मात्र 36 घंटे में बढ़कर 30 फीट पहुंच गया। यानी डेढ़ दिन के भीतर जलाशय में करीब साढ़े चार फीट पानी का इजाफा दर्ज किया गया। वर्तमान में भी जलाशय में लगातार पानी प्रवेश कर रहा है, जिससे जलस्तर में और वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
चारों प्रमुख जलाशयों में लगातार बढ़ रहा जलभराव
लगातार हो रही बारिश का लाभ जिले के अन्य प्रमुख जलाशयों को भी मिल रहा है। सिंचाई विभाग के अनुसार चारों प्रमुख जलाशयों में जलभराव लगातार बढ़ रहा है, जिससे आगामी रबी और खरीफ सीजन के लिए सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
वर्तमान जलभराव की स्थिति इस प्रकार है—
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तांदुला जलाशय – 30.00 फीट
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गोंदली जलाशय – 27.50 फीट
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खरखरा जलाशय – 18.40 फीट
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मटियामोती जलाशय – 6 मीटर
किसानों के लिए राहत और बेहतर सिंचाई की उम्मीद
बालोद जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। ऐसे में हर वर्ष बारिश के मौसम में किसानों की निगाहें प्रमुख जलाशयों के जलस्तर पर टिकी रहती हैं। जलाशयों में पर्याप्त जलभराव होने से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जिससे फसलों की पैदावार बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों के भरने से केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि भू-जल स्तर में भी सुधार होता है। इससे कुओं, हैंडपंपों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है, जिसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को लंबे समय तक मिलता है।
बारिश का दौर जारी रहा तो जल्द छलक सकता है तांदुला
सिंचाई विभाग का कहना है कि मानसून का अभी पर्याप्त समय शेष है। यदि आगामी दिनों में कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो तांदुला जलाशय इस वर्ष समय से पहले अपनी पूर्ण क्षमता तक भर सकता है और ओवरफ्लो होकर जिले के किसानों के लिए बड़ी राहत का कारण बनेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ पेयजल उपलब्धता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
तांदुला जलाशय : एक नजर में
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निर्माण कार्य प्रारंभ: वर्ष 1907
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निर्माण पूर्ण: वर्ष 1912
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औसत जलग्रहण क्षेत्र: 319.40 वर्ग मील
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औसत वार्षिक वर्षा: 50.09 इंच
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पूर्ण जलभराव क्षमता: 38.50 फीट
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निर्धारित सिंचित क्षेत्र: 1 लाख 66 हजार एकड़
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मुख्य नहर की लंबाई: 68.08 मील
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मुख्य नहर की प्रवाह क्षमता: 2413 क्यूसेक




















