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जिला अस्पताल में गहराया जल संकट: छह बोरवेल सूखे, मरीज और परिजन पानी के लिए परेशान

बालोद। भीषण गर्मी के बीच जिला मुख्यालय स्थित 100 बिस्तर वाले जिला अस्पताल में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। अस्पताल परिसर में लगे छह बोरवेल सूख जाने से पिछले एक महीने से मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। 44 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 8 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में केवल 6 हजार लीटर पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। पानी की कमी के कारण पेयजल से लेकर दैनिक आवश्यक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि इलाज के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी जरूरी है, लेकिन वर्तमान में पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
स्थिति को संभालने के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन नगर पालिका से प्रतिदिन दो टैंकर पानी मंगा रहा है, जिस पर करीब 500 रुपए प्रति टैंकर का खर्च आ रहा है। इसके बावजूद आवश्यकता के अनुरूप जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। अस्पताल आने वाले लोगों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

 


चार टैंकर की मांग, फिर भी नहीं मिल रही पर्याप्त आपूर्ति
सिविल सर्जन डॉ. आर.के. श्रीमाली ने बताया कि अस्पताल की जरूरत को देखते हुए नगर पालिका से पानी के टैंकरों की संख्या दो से बढ़ाकर चार किए जाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने से समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गर्मी के कारण अस्पताल परिसर के सभी छह बोरवेल सूख चुके हैं, जिससे जल संकट और गहरा गया है।
तांदुला जल प्रदाय योजना से जोड़ने की तैयारी
डॉ. श्रीमाली ने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला अस्पताल को तांदुला जल प्रदाय योजना से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है और तकनीकी संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन के बाद अस्पताल को नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति मिल सकेगी।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए जिला अस्पताल में अतिरिक्त जलापूर्ति की तत्काल व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव चिंता का विषय है और इससे मरीजों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

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