भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव और कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब पहुंचे। सभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब भी सत्ता में आती है तो विकास के बजाय भ्रष्टाचार और घोटालों को बढ़ावा देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में शराब, डीएमएफ, गोबर, धान और अन्य योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।

अरुण साव ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि सत्ता स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता कांग्रेस की कार्यशैली को देख चुकी है और अब दोबारा उसे सत्ता में आने का अवसर नहीं देगी। उपमुख्यमंत्री ने मंच से यह भी दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की संभावना है और जनता को सच्चाई जल्द दिखाई देगी।

सभा में मौजूद कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने की राजनीति करती है, जबकि भाजपा विकास और जनकल्याण की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील की।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली। उन्होंने भाजपा नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा को अपनी संभावित हार का डर सता रहा है, इसलिए उसके नेता लगातार भ्रामक बयानबाजी कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पलारी की जनता विकास और स्थानीय मुद्दों के आधार पर मतदान करेगी।

प्रचार के अंतिम दिन संगीता सिन्हा का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। वे गांवों में महिलाओं के बीच पहुंचीं और उनके साथ जमीन पर बैठकर नारेबाजी करती नजर आईं। उनका यह अंदाज पूरे दिन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय लोगों के बीच भी इस तस्वीर और प्रचार शैली को लेकर खूब चर्चा होती रही।
नगर पंचायत चुनाव के मतदान से पहले अंतिम दिन हुए इस हाई-प्रोफाइल प्रचार ने पलारी का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें 1 जून को होने वाले मतदान और उसके परिणाम पर टिकी हुई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, जबकि अंतिम फैसला मतदाता ईवीएम के माध्यम से करेंगे।




















