68 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा आज होगी साकार
बालोद। ओडिशा के जगन्नाथपुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा की तर्ज पर बालोद नगर में भी आज (16 जुलाई) भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी की भव्य रथयात्रा पूरे धार्मिक वैभव, पारंपरिक रीति-रिवाज और श्रद्धाभाव के साथ निकाली जाएगी। लगभग 68 वर्षों से चली आ रही यह ऐतिहासिक परंपरा आज भी उसी गरिमा के साथ निभाई जाएगी, जो बालोद की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
रथयात्रा को लेकर नगर में उत्साह का माहौल है। नगर पालिका परिषद, कपिलेश्वर मंदिर समिति एवं श्रद्धालुओं ने आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। रथ का रंग-रोगन, मरम्मत, आकर्षक सजावट एवं यात्रा मार्ग की साफ-सफाई का कार्य अंतिम रूप ले चुका है। पूरे नगर को धार्मिक वातावरण से सराबोर करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
दोपहर 12 बजे विशेष पूजा, 2 बजे निकलेगी रथयात्रा
रथयात्रा का शुभारंभ आज दोपहर 12 बजे कपिलेश्वर मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं भ्राता बलभद्र की विशेष पूजा-अर्चना से होगा। वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दोपहर 2 बजे भगवान का सुसज्जित रथ नगर भ्रमण के लिए रवाना होगा। परंपरा के अनुसार नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा विधिवत पूजा कर रथयात्रा का शुभारंभ किया जाएगा।
इन प्रमुख मार्गों से गुजरेगी भगवान की रथयात्रा
भगवान जगन्नाथ का रथ कपिलेश्वर मंदिर से निकलकर हलधर नाथ चौक, मोखलामांक्षी मंदिर, जयस्तंभ चौक, गंगासागर तालाब, दल्ली चौक, धड़ी चौक, पुराना बस स्टैंड, सदर रोड एवं बुधवारी बाजार होते हुए महामाया मंदिर पहुंचेगा। यहां भगवान जगन्नाथ नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर विराजमान रहेंगे।
हजारों श्रद्धालु बनेंगे आस्था के साक्षी
हर वर्ष की तरह इस बार भी बालोद सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भगवान के रथ की रस्सी खींचना सनातन परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि रथ की रस्सी पकड़ने और उसे खींचने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सभी पूरे भक्तिभाव से इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनते हैं। अनेक श्रद्धालु तो केवल रथ की रस्सी का स्पर्श करना ही अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।
68 वर्षों से जीवंत है धार्मिक परंपरा
बालोद में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का इतिहास लगभग 68 वर्ष पुराना है। यह परंपरा बिना किसी व्यवधान के लगातार निभाई जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन से पहले भी रथयात्रा कपिलेश्वर मंदिर से ही निकाली जाती थी और आज भी उसी परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। यह आयोजन नगर की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
नौ दिनों तक मौसी घर में विराजेंगे भगवान
रथयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं बलभद्र महामाया मंदिर में नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। इस अवधि में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं दर्शन का क्रम जारी रहेगा। आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान की वापसी यात्रा निकाली जाएगी और पुनः कपिलेश्वर मंदिर में विधिवत विराजमान कराया जाएगा।
ज्येष्ठ पूर्णिमा से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
सनातन परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का महाभिषेक (स्नान) कराया जाता है। इसके बाद भगवान अस्वस्थ होने के कारण कुछ दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते। स्वस्थ होने के पश्चात वे अपने भाई-बहन के साथ रथ पर आरूढ़ होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं तथा मौसी के घर विश्राम करते हैं। इसी दिव्य परंपरा का प्रतीक है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा।
नगरवासियों से रथयात्रा में शामिल होने की अपील
नगर पालिका अध्यक्ष एवं आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने नगरवासियों से परिवार सहित रथयात्रा में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और जनआस्था का महापर्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के दर्शन करने, रथ खींचने का पुण्य लाभ लेने तथा महाप्रसाद ग्रहण कर आयोजन को सफल बनाने का आग्रह किया।
कपिलेश्वर मंदिर से जुड़ा है नगर का इतिहास
स्थानीय मान्यता के अनुसार एक समय वर्तमान नयापारा क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित था और यहां केवल प्राचीन कपिलेश्वर मंदिर ही स्थित था। समय के साथ लोगों ने मंदिर के आसपास बसना प्रारंभ किया और धीरे-धीरे यह क्षेत्र विकसित होकर आज के नयापारा के रूप में स्थापित हुआ। इस कारण कपिलेश्वर मंदिर बालोद की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
नगर पालिका की तैयारियां पूरी
रथयात्रा के सफल आयोजन के लिए नगर पालिका द्वारा रथ का रंग-रोगन, मरम्मत एवं आकर्षक सजावट कराई गई है। यात्रा मार्ग की साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी आवश्यक तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन एवं आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अनुशासन एवं शांतिपूर्ण वातावरण में रथयात्रा में शामिल होकर इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।




















