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सुरक्षा के अभाव में हादसों को न्योता दे रहा संजयनगर का छोटा तालाब, मासूम के गिरने और गौमाता के फंसने से बढ़ी चिंता

बालोद। शहर के संजयनगर स्थित वार्ड क्रमांक-2 का छोटा तालाब इन दिनों सुरक्षा और स्वच्छता दोनों ही दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। तालाब के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने और उसमें लगातार जमा हो रहे गंदे पानी व कचरे के कारण यहां किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। हाल के दिनों में हुई दो घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले लगभग डेढ़ वर्ष का एक मासूम बच्चा तालाब में गिर गया था, जिसे आसपास मौजूद लोगों की सतर्कता और त्वरित प्रयास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं शनिवार को एक गौमाता भी तालाब में फंस गई, जिसे स्थानीय नागरिकों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
इन घटनाओं के बाद वार्डवासियों में नगर पालिका प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तालाब की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई गंभीर और दुखद हादसा हो सकता है।


गंदे नालों का पानी बन रहा तालाब की बदहाली का कारण
स्थानीय नागरिकों के अनुसार सदर क्षेत्र की अधिकांश नालियों का गंदा पानी इसी तालाब में आकर गिरता है। इसके साथ बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट भी तालाब में जमा हो रहे हैं, जिससे तालाब पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। लगातार जमा हो रही गंदगी के कारण पानी से दुर्गंध उठ रही है और आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
मच्छरों और संक्रमण का बढ़ा खतरा
तालाब की बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बदबू और गंदगी के कारण आसपास रहने वाले परिवारों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में जलभराव और गंदे पानी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बनी हुई है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ गई है।


बार-बार शिकायत, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान
वार्डवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका परिषद के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि समय-समय पर केवल औपचारिक सफाई कर दी जाती है, लेकिन तालाब की मूल समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
वार्डवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब की नियमित सफाई और गहरीकरण कराया जाए। साथ ही तालाब के चारों ओर सुरक्षा के लिए मजबूत चारदीवारी अथवा रेलिंग लगाई जाए, ताकि भविष्य में किसी बच्चे, पशु या अन्य व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना न हो। इसके अलावा गंदे नालों के पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने तथा तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने अब भी इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। उन्होंने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मामले को प्राथमिकता देते हुए तत्काल निरीक्षण कराने, जिम्मेदार अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने तथा स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। वार्डवासियों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई न केवल संभावित दुर्घटनाओं को रोक सकती है, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी उपलब्ध करा सकती है।

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