जिला प्रशासन द्वारा संग्रहण केंद्रों से समय पर धान उठाव सुनिश्चित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप मिलर्स और क्रेताओं द्वारा नियमित रूप से धान का परिवहन किया जा रहा है। जिले के चारों संग्रहण केंद्रों में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 2 लाख 38 हजार 152 मीट्रिक टन से अधिक धान का भंडारण किया गया था। इनमें से अब तक 1 लाख 49 हजार 173 मीट्रिक टन से अधिक धान का सफलतापूर्वक उठाव किया जा चुका है।
वर्तमान में लगभग 88 हजार 979 मीट्रिक टन धान का उठाव शेष है, जिसे तेजी से पूरा करने की दिशा में कार्य जारी है। प्रतिदिन औसतन 5 हजार मीट्रिक टन धान संग्रहण केंद्रों से उठाया जा रहा है, जिससे शेष स्टॉक को भी निर्धारित समयावधि में खाली करने का लक्ष्य रखा गया है।

धान की गुणवत्ता बनाए रखने और मानसून के दौरान नुकसान से बचाने के लिए सभी संग्रहण केंद्रों में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शेष भंडारित धान के स्टैकों को सुरक्षित कैप कवर से ढंककर रखा गया है। जलभराव की स्थिति से बचने के लिए स्टैकों के आसपास नालियों का निर्माण कराया गया है ताकि वर्षा का पानी जमा न हो सके।
इसके अलावा धान को दीमक, चूहों और अन्य नुकसानदायक तत्वों से सुरक्षित रखने के लिए नियमित रूप से कीटनाशक और चूहानाशक दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षित भंडारण और तेज उठाव की रणनीति के कारण जिले में धान की गुणवत्ता बनाए रखने में सफलता मिली है।
प्रदेश में धान उठाव के मामले में बालोद का प्रथम स्थान प्राप्त करना प्रशासनिक समन्वय, प्रभावी प्रबंधन और समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम माना जा रहा है। इससे न केवल संग्रहण केंद्रों पर दबाव कम हुआ है, बल्कि आगामी मानसून से पहले धान के सुरक्षित निष्पादन का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।




















