दल्लीराजहरा/बालोद। बालोद जिले के दल्लीराजहरा नगर में इन दिनों बड़ी संख्या में चमगादड़ों की हो रही मौत ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बीएसपी एमव्हीटी सेंटर क्षेत्र में स्थित पेड़ों पर वर्षों से बसेरा करने वाले हजारों Bat Die-Off चमगादड़ लगातार मृत अवस्था में मिल रहे हैं। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान को इन मौतों का मुख्य कारण माना जा रहा है, लेकिन अब मामले में किसी संभावित वायरस संक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार नगर का तापमान दोपहर के समय 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। अत्यधिक गर्मी के चलते रोजाना सैकड़ों चमगादड़ पेड़ों से नीचे गिरकर दम तोड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों के मुताबिक अब तक 500 से ज्यादा चमगादड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रतिदिन 200 से अधिक चमगादड़ मृत अवस्था में मिल रहे हैं।
लैब टेस्ट के लिए भोपाल भेजे जाएंगे सैंपल
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग भी सतर्क हो गया है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मृत चमगादड़ों के सैंपल जांच के लिए भोपाल लैब भेजे जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौतें केवल गर्मी के कारण हो रही हैं या इसके पीछे किसी वायरस संक्रमण की भी आशंका है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी संक्रमण की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन एहतियात के तौर पर मृत चमगादड़ों को उठाने और नष्ट करने के दौरान कर्मचारियों को मास्क और ग्लब्स का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
बदबू और संक्रमण की आशंका से लोग परेशान
लगातार हो रही मौतों के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैलने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मृत चमगादड़ों से उठने वाली बदबू के कारण आसपास रहना मुश्किल हो गया है। सड़क से गुजरने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर पालिका की टीम रोज सुबह मौके पर पहुंचकर मृत चमगादड़ों को एकत्रित कर उन्हें नष्ट करने की कार्रवाई कर रही है। बावजूद इसके लगातार बढ़ती संख्या के कारण कई मृत चमगादड़ क्षेत्र में ही पड़े रह जा रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमियों ने जताई चिंता
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है। पर्यावरण प्रेमी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि चमगादड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वे कीट नियंत्रण और परागण में मदद करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में उनकी मौत होना पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है।
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ता तापमान, हरियाली में कमी और पेड़ों की कटाई वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठ रहे सवाल
जिस क्षेत्र में चमगादड़ों की मौत हो रही है वह माइंस क्षेत्र बताया जा रहा है। यही वजह है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। वहीं ग्रीन कमांडो और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने मामले की गंभीर जांच कर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।




















