
स्थानीय गंगासागर स्थित भगवान परशुराम प्रतिमा स्थल पर सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना, अभिषेक, हवन और आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया।
ब्राह्मण समाज के जिलाध्यक्ष अटल दुबे ने कहा कि भगवान परशुराम, माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे। वे भगवान विष्णु के अवतार और भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। शिव से प्राप्त परशु धारण करने के कारण उनका नाम परशुराम पड़ा। उन्होंने जिलेवासियों को भगवान परशुराम जन्मोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं।

इस अवसर पर संतोष दुबे, शेषनारायण दुबे, विशाल शुक्ला, प्रमोद शर्मा, देवेंद्र शुक्ला, बृजेश पांडे, कृष्णा दुबे, आदित्य दुबे, धीरज उपाध्याय, बंटी, विनोद शर्मा, वैभव शर्मा, अनुराग दुबे, हरीश दुबे, सौरभ और बिट्टू दुबे सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

इधर, पुराने बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा राहगीरों के लिए शीतल शरबत वितरण शिविर लगाया गया। तेज गर्मी के बीच इस पहल को लोगों ने खूब सराहा। मंडल की महिलाओं ने स्वयं उपस्थित रहकर लोगों को शरबत पिलाया और सेवा भावना का परिचय दिया।
मंडल की ओर से बताया गया कि वैशाख माह में जल सेवा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी उद्देश्य से यह आयोजन किया गया ताकि लोगों को गर्मी से राहत मिल सके और समाज में सेवा संस्कार मजबूत हों।
कार्यक्रम में प्रेमा काबरा, किरण काबरा, संगीता टुवाणी, उमा मंत्री, संध्या मंत्री, ज्योति मंत्री, प्रीति चांडक, यशोदा चांडक, आशा चांडक, किरण पनपालिया, उषा पनपालिया, लक्ष्मी चांडक, मीणा चांडक, पूजा तापड़िया, प्रीति तापड़िया, घटा टावरी, तारा राठी, रामेश्वरी टावरी, छाया राठी और मीणा काबरा उपस्थित रहीं। वहीं कमल पनपालिया, शरद अग्रवाल, तरुण बडतिया और अमित माधवानी ने भी सहयोग दिया।

अक्षय तृतीया पर बालोद में हुए इन आयोजनों ने यह साबित किया कि शहर की पहचान केवल उत्सवों से नहीं, बल्कि संस्कार, सामाजिक समरसता और सेवा भाव से भी बनती है।




















