
यशवंत जैन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व और सम्मान देने का काम किया है। केंद्र सरकार की योजनाओं से महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है। महिला आरक्षण पर विपक्ष का रवैया उनकी वास्तविक मानसिकता को उजागर करता है।
यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं को निर्णयकारी भूमिका में लाना चाहती है, जबकि विरोधी दल केवल राजनीतिक स्वार्थ में उलझे हैं।

तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं ने उत्कृष्ट नेतृत्व दिया है। अब समय आ गया है कि संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर सुनिश्चित की जाए।
चेमन देशमुख ने कहा कि विपक्ष ने संसद में महिलाओं के अधिकारों को रोकने का काम किया है। भाजपा गांव-गांव तक यह संदेश पहुंचाएगी कि कौन महिलाओें के साथ खड़ा है और कौन उनके अवसरों के खिलाफ है।
प्रतिभा चौधरी ने कहा कि महिला नेतृत्व आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर चुका है। राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की संख्या बढ़ना लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
धारा पंकज चौधरी ने कहा कि महिलाएं अब केवल चुनावी वादों से संतुष्ट नहीं होंगी। वे वास्तविक भागीदारी चाहती हैं और भाजपा इसी दिशा में काम कर रही है।

वीरेंद्र साहू ने कहा कि देश की महिलाएं समझ चुकी हैं कि कौन उनके हितों के लिए गंभीर है और कौन केवल दिखावटी राजनीति करता है। आने वाले समय में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
कृष्णकांत पवार ने कहा कि महिला आरक्षण सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम है। इसका विरोध करना प्रगतिशील सोच का विरोध है।
राकेश यादव ने कहा कि भाजपा का संकल्प महिलाओं को हर स्तर पर नेतृत्व देना है। संसद में बना गतिरोध अस्थायी है, लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।
महिला मतदाताओं पर नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा विषय बन सकता है। भाजपा इसे नारी सम्मान और भागीदारी के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। बालोद जिले के भाजपा नेताओं के बयानों से साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देने के मूड में है।




















