नई दिल्ली। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के बाद Narendra Modi ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इसे देश की महिलाओं के सपनों पर चोट बताया। प्रधानमंत्री ने भावनात्मक और आक्रामक अंदाज़ में कहा कि सरकार के प्रयासों के बावजूद महिला आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाया जा सका, जिसके लिए उन्होंने देश की माताओं, बहनों और बेटियों से क्षमा मांगी।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत सीधे महिलाओं को संबोधित करते हुए की और कहा कि भारत की नारी शक्ति की उड़ान रोक दी गई है। उन्होंने इसे केवल एक विधेयक की हार नहीं, बल्कि आधी आबादी के अधिकारों को टालने की कोशिश बताया। मोदी ने कहा कि संसद में जब प्रस्ताव गिरा तो कुछ विपक्षी दलों द्वारा तालियां बजाना महिलाओं के सम्मान पर चोट जैसा था।
विपक्ष पर सीधा राजनीतिक प्रहार
प्रधानमंत्री ने Indian National Congress, Dravida Munnetra Kazhagam, All India Trinamool Congress और Samajwadi Party का नाम लेकर आरोप लगाया कि इन दलों ने स्वार्थ और परिवारवादी राजनीति के कारण महिला आरक्षण का रास्ता रोका। उन्होंने कहा कि ये दल महिलाओं को “फॉर ग्रांटेड” ले रहे हैं, जबकि 21वीं सदी की महिला सब देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।
मोदी ने यह भी कहा कि विपक्ष ने संविधान निर्माताओं की भावना का अपमान किया है और जनता उन्हें इसकी सजा देगी।
2029 चुनाव से लागू होने का दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन किसी से कुछ छीनने का नहीं, बल्कि महिलाओं को उनका लंबित अधिकार देने का प्रयास था। उनके अनुसार यह व्यवस्था 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से महिलाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित कर सकती थी। उन्होंने इसे नई सदी के भारत में महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व देने वाला ऐतिहासिक अवसर बताया।
क्षेत्रीय दलों को भी घेरा
प्रधानमंत्री ने दक्षिण और पूर्व भारत के दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर विधेयक पारित होता तो तमिलनाडु, बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल सहित सभी राज्यों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ती। लेकिन क्षेत्रीय दलों ने अपने ही राज्यों के हितों के खिलाफ काम किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवादी दल नहीं चाहते कि उनके परिवारों से बाहर की महिलाएं राजनीति में उभरें। पंचायतों और नगरीय निकायों में सफल महिलाओं के विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचने से ये दल असहज हैं।
कांग्रेस को बताया “एंटी रिफॉर्म पार्टी”
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस को “एंटी रिफॉर्म पार्टी” बताते हुए कहा कि उसने हर बड़े सुधार का विरोध किया है। मोदी ने जनधन, डिजिटल पेमेंट, जीएसटी, ट्रिपल तलाक कानून, अनुच्छेद 370 हटाने, समान नागरिक संहिता, वन नेशन वन इलेक्शन, मतदाता सूची शुद्धिकरण और अन्य सुधारों का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर विकास विरोधी राजनीति का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि आज देश जिन कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनकी जड़ कांग्रेस की वर्षों पुरानी टालमटोल और निर्णयहीन राजनीति है।
भावनात्मक समापन: “हम हार नहीं मानेंगे”
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को भरोसा दिलाया कि महिला आरक्षण का संघर्ष रुकेगा नहीं। उन्होंने कहा कि संसद में जरूरी संख्याबल नहीं मिला, लेकिन देश की 100 प्रतिशत नारी शक्ति का आशीर्वाद सरकार के साथ है।
मोदी ने कहा कि यह पराजय नहीं, केवल एक अस्थायी बाधा है। आने वाले समय में फिर अवसर आएंगे और महिलाओं को संसद तथा विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिलाकर रहेंगे।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन केवल विधेयक पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि 2026 की राष्ट्रीय राजनीति की नई रेखा भी माना जा रहा है। भाजपा ने महिला सशक्तिकरण को अपने केंद्रीय राजनीतिक नैरेटिव के रूप में सामने रखा है, जबकि विपक्ष पर महिला विरोधी छवि थोपने की रणनीति स्पष्ट दिखाई दी।
महिला मतदाता देश की चुनावी राजनीति में निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं। ऐसे में यह संबोधन आने वाले चुनावों से पहले महिलाओं तक सीधा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में बने गतिरोध ने देश की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। प्रधानमंत्री ने इसे जनभावना बनाम विपक्षी राजनीति की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत किया है। अब देखना होगा कि यह मुद्दा संसद से निकलकर जनता के बीच किस रूप में आकार लेता है, क्योंकि आने वाले समय में नारी शक्ति ही भारतीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है।




















