प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक होर्डिंग पर चढ़कर पोस्टर लगाने का कार्य कर रहा था, तभी अचानक वह बिजली प्रवाह की चपेट में आ गया। करंट इतना तेज था कि युवक बुरी तरह झुलस गया और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उसे नीचे उतारकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुंडरदेही पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मर्च्युरी में रखा गया है।

सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस होर्डिंग पर कार्य कराया जा रहा था, वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक के पास न तो कोई सुरक्षा बेल्ट थी और न ही विद्युत सुरक्षा उपकरण। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि होर्डिंग के पास विद्युत तार गुजर रहे थे, तो वहां पहले से सुरक्षा जांच और बिजली आपूर्ति बंद करने जैसी सावधानियां बरती जानी चाहिए थीं। बिना पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध के इस तरह काम कराना सीधे तौर पर श्रमिक की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है।
अनुमति प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
घटना के बाद यह प्रश्न भी उठ रहा है कि आखिर बिना सुरक्षा ऑडिट और मानकों के पालन के इस होर्डिंग को अनुमति कैसे दी गई? क्या संबंधित विभागों ने निरीक्षण किया था? यदि किया गया, तो सुरक्षा कमियों को नजरअंदाज क्यों किया गया? होर्डिंग कंपनी की जवाबदेही के साथ-साथ प्रशासनिक अनुमति प्रक्रिया भी अब सवालों के घेरे में है।
पुलिस जांच जारी
गुंडरदेही पुलिस ने मामले को जांच में लिया है। प्रारंभिक जानकारी जुटाई जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार कौन है। पुलिस होर्डिंग संचालक, कंपनी प्रबंधन तथा संबंधित विभागों से भी पूछताछ कर सकती है।
जिम्मेदारी तय होना बाकी
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा लापरवाही की गंभीर तस्वीर सामने लाता है। अब देखना होगा कि जांच में किसकी जिम्मेदारी तय होती है—होर्डिंग कंपनी, ठेकेदार, संबंधित विभाग या प्रशासनिक लापरवाही। फिलहाल एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है और कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।




















