रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत इन दिनों गाँवों की गलियों तक पहुँच चुकी है। भारतीय जनता पार्टी का ‘गाँव चलो-बस्ती चलो’ अभियान अब केवल एक संगठनात्मक गतिविधि नहीं रह गया, बल्कि यह सत्ता और संगठन के बीच सीधे संवाद का बड़ा राजनीतिक प्रयोग बनकर उभर रहा है। प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन के मुताबिक, इस अभियान में कार्यकर्ताओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपने जनाधार को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
पार्टी द्वारा 6 अप्रैल को स्थापना दिवस के साथ शुरू किया गया यह अभियान 7 से 12 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में चल रहा है और अब अपने चरम पर दिखाई दे रहा है। इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के शीर्ष नेतृत्व भी सीधे मैदान में उतरकर गाँव-गाँव पहुँच रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और मंत्री केदार कश्यप सहित सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस दौरान वे न केवल लोगों की समस्याएँ सुन रहे हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी भी घर-घर तक पहुँचा रहे हैं।
अभियान के तहत चयनित गाँवों में लगातार जनसंपर्क किया जा रहा है, जहाँ सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनका सम्मान भी किया जा रहा है। इसे राजनीतिक रूप से सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत दिखाने और जनता के बीच विश्वास मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान केवल जनता तक पहुँचने का माध्यम नहीं, बल्कि संगठन को सक्रिय और ऊर्जावान बनाने की एक बड़ी कवायद भी है, जिसमें कार्यकर्ताओं की व्यापक भागीदारी पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार कर रही है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहाँ ग्रामीण वोट बैंक चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाता है, ऐसे में भाजपा का यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह एक तरह से सरकार और संगठन के संयुक्त प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है, जिसमें सीधे संवाद के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, ‘गाँव चलो-बस्ती चलो’ अभियान भाजपा के लिए केवल एक जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों को साधने की एक सुनियोजित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ हर गाँव और हर बस्ती तक पहुँचकर भरोसे की नई जमीन तैयार करने का प्रयास साफ नजर आता है।




















