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संगठन में भरोसे का नाम बने विकास चोपड़ा: असम में मेहनत, समर्पण और नेतृत्व का असर

बालोद/रायपुर -राजनीति में कई चेहरे आते-जाते रहते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जो अपने काम, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा से अलग पहचान बना लेते हैं। नपा के पूर्व अध्यक्ष विकास चोपड़ा उन्हीं चुनिंदा नामों में शामिल हो रहे हैं, जिन पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है।

असम विधानसभा चुनाव के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा उन्हें विधानसभा कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्त किया जाना इस भरोसे का स्पष्ट संकेत था। यह जिम्मेदारी सामान्य नहीं थी—एक ऐसे राज्य में संगठन को मजबूत करना, जहां स्थानीय समीकरण, भाषा, संस्कृति और राजनीतिक चुनौतियां अलग हों। इसके बावजूद विकास चोपड़ा ने जोरहाट जिले में करीब दो महीनों तक पूरी सक्रियता और प्रतिबद्धता के साथ काम किया।

उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा पहलू यह रहा कि उन्होंने केवल औपचारिक भूमिका निभाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित किया। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाना और चुनावी रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना—इन सभी पहलुओं पर उन्होंने बराबर ध्यान दिया। यही वजह रही कि उनका काम पार्टी नेतृत्व की नजर में आया।
हालांकि, इस दौरान एक दुखद मोड़ भी आया जब उनके साथी कोऑर्डिनेटर रूपेश ठाकुर का असम में आकस्मिक निधन हो गया। इस घटना ने न केवल संगठन को झकझोर दिया, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी चोपड़ा को प्रभावित किया। इस परिस्थिति में उन्हें निर्धारित समय से पहले वापस लौटना पड़ा, लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने जो प्रभाव छोड़ा, वह उनकी कार्यक्षमता को दर्शाता है।


उनकी इसी लगन और ईमानदार प्रयासों को देखते हुए AICC के महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह ने पत्र के माध्यम से उनकी सराहना की। यह केवल एक औपचारिक प्रशंसा नहीं, बल्कि उस कार्यसंस्कृति की पहचान है, जिसमें समर्पण और परिणाम दोनों शामिल हैं।

विकास चोपड़ा ने इस सराहना को अपने लिए प्रेरणा का स्रोत बताया है। उनका मानना है कि पार्टी का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें लगातार विभिन्न राज्यों में काम करने का अवसर देता रहा है, जिससे उनका अनुभव व्यापक हो रहा है और संगठन को समझने की उनकी क्षमता और मजबूत हो रही है।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, जहां अक्सर तात्कालिक लाभ और प्रचार पर ज्यादा जोर दिया जाता है, वहां विकास चोपड़ा जैसे नेता संगठनात्मक मजबूती और निरंतर मेहनत के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं। उनकी कार्यशैली यह संकेत देती है कि वे केवल पद के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को निभाने के लिए राजनीति में सक्रिय हैं।

आने वाले समय में यदि इसी तरह का समर्पण, सक्रियता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहती है, तो यह तय है कि विकास चोपड़ा न सिर्फ कांग्रेस संगठन में एक भरोसेमंद और प्रभावी रणनीतिकार के रूप में स्थापित होंगे, बल्कि पार्टी के विस्तार और मजबूती में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अपनी अलग पहचान कायम करेंगे।

 

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