Skip to main content

प्रदेश रूचि

बालोद में यूरिया संकट गहराया: एफपीओ किसानों ने इफ्फको पर कालाबाजारी का लगाया आरोप, डिप्टी कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बालोद। जिले में कृषि उत्पादक संगठन (FPO) से जुड़े किसान इन दिनों यूरिया खाद की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से फसलों पर असर पड़ रहा है और किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों से ऊंचे दाम पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति को लेकर सक्षम एग्रोफेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, डौंडीलोहारा के पदाधिकारियों ने डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की है।
एफपीओ के डायरेक्टर्स ने इफ्फको (IFFCO) के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यूरिया की कालाबाजारी की जा रही है और इसे निजी दुकानों में अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि एफपीओ को पर्याप्त आपूर्ति नहीं दी जा रही।
संस्था के अध्यक्ष दीपक ठाकुर ने बताया कि कंपनी का गठन भारत सरकार की 10,000 एफपीओ योजना के तहत 25 अप्रैल 2023 को कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत नेफेड के सहयोग से किया गया था। वर्तमान में संस्था से 750 किसान जुड़े हैं और यह संगठन किसानों को उचित मूल्य पर खाद-बीज, दवाइयां उपलब्ध कराने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे किसान
संस्था के सचिव एन. कुमार ने बताया कि एफपीओ द्वारा वृक्षारोपण और कृषि विविधीकरण के कई प्रयास किए गए हैं। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना और किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत कई गांवों में पौधारोपण कराया गया। इसके बावजूद पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि विभाग से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने बताया कि कई गांवों के किसान धान के बजाय दलहन और तिलहन फसल लेने के इच्छुक थे, लेकिन कृषि विभाग द्वारा मांग अस्वीकार कर दी गई, जिससे किसान योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए।

डीलरशिप के बावजूद नहीं मिल रही यूरिया
एफपीओ के डायरेक्टर महेश कोरेटी ने बताया कि संस्था के पास इफ्फको की डीलरशिप होने के बावजूद यूरिया की आपूर्ति नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले क्षेत्र अधिकारी दिनेश गांधी के कार्यकाल में नियमित रूप से खाद उपलब्ध होती थी, लेकिन वर्तमान अधिकारी शुभम काले के आने के बाद से स्थिति बिगड़ गई है।

उन्होंने बताया कि बालोद में तीन बार यूरिया की रेक आने के बावजूद एफपीओ को खाद नहीं दी गई। हर बार अगली खेप का हवाला देकर टाल दिया जाता है, जबकि निजी व्यापारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। 19 और 27 मार्च को इफ्फको रायपुर के अधिकारियों को पत्र देने के बावजूद 30 मार्च 2026 को आई रेक से भी एफपीओ को यूरिया नहीं मिला।

कालाबाजारी को मिल रहा बढ़ावा, किसानों में आक्रोश
एफपीओ पदाधिकारियों का आरोप है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण खाद की कालाबाजारी को बढ़ावा मिल रहा है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने से उनकी लागत बढ़ रही है और उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान अध्यक्ष दीपक ठाकुर, सचिव एन. कुमार, डायरेक्टर महेश कोरेटी, दूजेश्वरी कोर्राम, तुलाराम चुरेंद्र, मुकेश कुमार, मेनका ठाकुर, डी.के. भूआर्य सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
 एफपीओ पदाधिकारियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि खेती प्रभावित न हो और किसानों को राहत मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!