इस अवसर पर विधिवत हवन-पूजन के साथ भगवान हनुमान का तेल, सिंदूर और लाल वस्त्रों से विशेष श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मंगलकामनाएं कीं और शाम को भव्य महाआरती में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

हनुमान जयंती के मौके पर ग्रामवासियों द्वारा दोपहर से लेकर देर रात तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। खास बात यह रही कि गुरुवार रात गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला—सभी ग्रामीण मंदिर परिसर में एकत्रित होकर कतारबद्ध तरीके से प्रसाद स्वरूप भोजन करते नजर आए। यह दृश्य गांव की एकता और आस्था का अनूठा उदाहरण बना।

इस दौरान ग्रामीणों ने गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ भगवान हनुमान की भव्य शोभायात्रा भी निकाली। शोभायात्रा में महिलाएं और युवतियां सिर पर कलश रखकर शामिल हुईं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।

जिलेभर में भी दिखी हनुमान जयंती की धूम
हनुमान जयंती के अवसर पर बालोद जिले के लगभग सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों में स्थित हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा पाठ और भंडारे का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय के पुराना बस स्टैंड, बुढ़ापारा, सिवनी, तांदुला नदी के पास तथा कृषि उपज मंडी परिसर में भी विशाल भंडारे आयोजित हुए।
कृषि उपज मंडी में आयोजित भंडारा विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा, जहां पिछले कई वर्षों से यह परंपरा जारी है। बताया जाता है कि विगत दो वर्षों से मंडी सचिव संजीव वाहिले के कार्यकाल में भंडारे का स्वरूप और भी भव्य हुआ है। यहां करीब 4 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। हनुमान जयंती पर मेढ़की से लेकर पूरे जिले तक उमड़ी आस्था की यह लहर न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक भागीदारी का भी संदेश दे गई।




















