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आस्था के रंग में रंगे पत्रकार: जगन्नाथ धाम में आध्यात्मिक सुकून, पुरी से कोणार्क तक यादगार बना जिला प्रेस क्लब बालोद का सफर

बालोद। पुनर्गठन के बाद जिला प्रेस क्लब बालोद ने अपनी पहली सामूहिक तीर्थ यात्रा को जिस भव्य और आध्यात्मिक रूप में संपन्न किया, वह लंबे समय तक स्मृतियों में दर्ज रहने वाला अनुभव बन गया। अध्यक्ष संतोष साहू के नेतृत्व में 22 पत्रकारों का दल चार दिवसीय यात्रा पर निकला, जहां आस्था, संस्कृति और आपसी समन्वय का अनूठा संगम देखने को मिला।

इस यात्रा का प्रमुख केंद्र जगन्नाथ मंदिर रहा, जहां पत्रकारों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। विशेष बात यह रही कि सभी को गर्भगृह के समीप से दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ, जिसने इस यात्रा को और अधिक भावुक और अविस्मरणीय बना दिया। इस दौरान सभी ने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।


यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी व्यापक भ्रमण किया गया। दल ने साक्षीगोपाल मंदिर, लिंगराज मंदिर और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का दौरा कर भारतीय स्थापत्य कला और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखा। वहीं पुरी के पवित्र समुद्र तट पर स्नान कर सभी ने एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
पूरे प्रवास के दौरान वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन, पारंपरिक अनुष्ठानों में सहभागिता और समुद्र तट के दिव्य परिवेश ने यात्रा को बहुआयामी बना दिया। यह अनुभव केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और आत्मिक संतुलन का भी प्रतीक बना।
यात्रा के समापन पर सभी पत्रकारों के चेहरे पर संतोष और उत्साह स्पष्ट झलक रहा था। प्रतिभागियों ने इसे “अविस्मरणीय और प्रेरणादायक” बताते हुए जिला प्रेस क्लब की इस पहल की खुलकर सराहना की।


इस तीर्थ यात्रा में वरिष्ठ पत्रकार मोहन दास मानिकपुरी, अरुण उपाध्याय, किशोर साहू, संजय दुबे, विवेक वैष्णव, मोनू चौधरी, संजय सोनी, अनीस राजपूत, जगन्नाथ साहू, देवेंद्र साहू, राजेश साहू, नरेश श्रीवास्तव, दानवीर साहू, राकेश द्विवेदी, शंकर साहू, जागेश्वर साहू, करण सोनी, ऋषि सिन्हा, घनाराम साहू सहित अन्य साथी शामिल रहे।


वहीं इस यात्रा को सफल बनाने में वरिष्ठ पत्रकार रवि भूतड़ा, ओम टुवानी, ब्रजेश पांडे, राहुल भूतड़ा, नितेश वर्मा,मंजू शर्मा और अफजल रिजवी सहित अन्य सहयोगियों का मार्गदर्शन और विशेष योगदान उल्लेखनीय रहा।
कुल मिलाकर, यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं रही, बल्कि पत्रकारों के बीच आपसी एकजुटता, अनुभवों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बनकर उभरी।

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