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“लाखों आदिवासियों को रोजगार का सहारा, वन धन योजना को यज्ञदत्त शर्मा ने बताया ‘गेम चेंजर’”

नई दिल्ली। देश के आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित वन धन योजना का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) और प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के तहत वन धन विकास केंद्रों की स्थापना कर रहा है, जिससे आदिवासी परिवारों को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं। 


उन्होंने बताया कि अब तक PMJVM के अंतर्गत 4,172 वन धन विकास केंद्रों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनसे 12.48 लाख से अधिक आदिवासी जुड़ चुके हैं। वहीं PM-JANMAN योजना के तहत 540 केंद्रों को स्वीकृति मिली है, जिनसे लगभग 46 हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से आदिवासी समुदाय को कच्चे माल, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, परिवहन और भंडारण जैसी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार में ला सकें।

योजना के क्रियान्वयन में TRIFED की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो जनजातीय उत्पादों के विपणन और बिक्री को बढ़ावा दे रहा है। ट्राइफेड देशभर में ‘Tribes India’ आउटलेट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ‘आदि महोत्सव’ जैसे आयोजनों के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध करा रहा है। साथ ही ONDC प्लेटफॉर्म के जरिए भी आदिवासी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, PMJVM के तहत स्वीकृत केंद्रों में से 2,817 केंद्र वर्तमान में संचालित हैं, जिनके माध्यम से 15,829.88 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। वहीं PMJANMAN योजना के तहत 491 केंद्र संचालित हो चुके हैं, जिनकी बिक्री 527.37 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि वन धन योजना आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार और आय सृजन का मजबूत माध्यम बन रही है।


इधर, छत्तीसगढ़ लघु वनोपज समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने इस योजना को राज्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से आदिवासी परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पहले जहां वनोपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था, अब प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के जरिए वही उत्पाद बेहतर कीमत पर बिक रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

शर्मा ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए वरदान साबित हो रही है तथा इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने के साथ पलायन में भी कमी आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इस योजना को और अधिक विस्तार और तकनीकी समर्थन दिया जाए, तो छत्तीसगढ़ देश में वन आधारित अर्थव्यवस्था का मॉडल राज्य बन सकता है
कुल मिलाकर, वन धन योजना अब आदिवासी समाज के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोलते हुए ग्रामीण विकास की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रही है।

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