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बालोद में नवरात्रि नवमी पर भक्ति का सैलाब: गंगा मैया मंदिर से निकली भव्य ज्योत-जंवारा विसर्जन शोभायात्रा

बालोद। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल गंगा मैया मंदिर में नवमी के दिन श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। शुक्रवार को गाजे-बाजे और माता सेवा गीतों के बीच ज्योत-जंवारा विसर्जन की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इससे पहले गुरुवार को महाअष्टमी पर्व पर मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन कर पूर्णाहुति दी गई। जिला मुख्यालय सहित विभिन्न देवी मंदिरों में भी सुबह से ही हवन-पूजन और विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। दिनभर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही।
भक्तों की उमड़ी भारी भीड़, भावुक हुआ माहौल
मां गंगा मैया झलमला में ज्योत-जंवारा विसर्जन का विशेष आयोजन किया गया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मंदिर के गर्भगृह से 51 ज्योत जंवारा को कुंवारे लड़कों ने सिर पर धारण कर शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा बांधा तालाब तक पहुंची, जहां विधिवत विसर्जन किया गया।
इस दौरान आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु दर्शन और शोभायात्रा देखने पहुंचे। नौ दिनों तक माता की आराधना के बाद विसर्जन के समय कई भक्त भावुक हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं। इस अद्भुत दृश्य को देखने हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यहां जुटते हैं।
यात्रा के दौरान लगभग आधे घंटे तक बालोद-झलमला मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा।


गाजे-बाजे और भंडारे के साथ उत्सव का माहौल
जिले के विभिन्न मंदिरों में महाअष्टमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ महाप्रसाद का वितरण किया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। जगह-जगह भंडारे आयोजित किए गए, जो देर शाम तक चलते रहे। खीर-पूड़ी सहित विभिन्न प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किए गए।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के देवी मंदिरों में शुक्रवार को माता सेवा गीतों के साथ ज्योत-जंवारा विसर्जन किया गया, जिससे पूरे जिले में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

कन्या पूजन के साथ पूर्ण हुई नवरात्रि साधना
नवरात्रि के समापन पर मंदिरों में कन्या पूजन का विशेष आयोजन किया गया। नौ कन्याओं के चरण धोकर उन्हें माहुर लगाया गया और आरती उतारी गई। कन्याओं को लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ी, फीता, दर्पण, काजल एवं दक्षिणा अर्पित कर उनका सम्मान किया गया।
इसके बाद कन्याओं और लंगूरवा को खीर, हलवा और पूड़ी का प्रसाद परोसा गया, जिससे नवरात्रि की पूजा विधिवत पूर्ण हुई।

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