मामले की जानकारी कुसुमकसा निवासी पूर्व जनपद सदस्य संजय बैंस द्वारा दी गई है। उनके अनुसार बच्ची शाम करीब 6 बजे घर से अचानक गायब हो गई थी, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की। बच्ची के नहीं मिलने पर सोशल मीडिया में उसकी फोटो और जानकारी साझा करते हुए मदद की अपील की गई, जो तेजी से वायरल हुई। इसी बीच बच्ची गांव से कुछ दूरी पर सड़क किनारे मिल गई और उसे उपचार के लिए दल्लीराजहरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बच्ची ने पहले सुनाई थी अपहरण की कहानी
सुरक्षित मिलने के बाद बच्ची ने परिजनों और ग्रामीणों को बताया था कि कुछ अज्ञात लोगों ने उसे चॉकलेट खिलाई, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद उसे बाइक से किसी स्थान पर ले जाया गया, जहां 10 से 12 लोग मौजूद थे। बच्ची के कथनानुसार बाद में उसे बोरे में भरकर गांव के पास सड़क किनारे छोड़ दिया गया। बच्ची की इस बात के सामने आने के बाद क्षेत्र में बच्चा चोर गिरोह सक्रिय होने की आशंका को लेकर चर्चा तेज हो गई थी।
शिकायत के दौरान सामने आई सच्चाई

अगले दिन जब परिजन घटना की लिखित शिकायत करने दल्लीराजहरा थाना पहुंचे, तब पूछताछ के दौरान बच्ची ने पूरी सच्चाई बताई। उसने कहा कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ था।
दरअसल, बच्ची शाम को घूमते हुए मुख्य मार्ग तक पहुंच गई थी। उसी समय वहां एक ट्रक खराब होने के कारण चालक और अन्य साथी वाहन चालक रुककर भोजन बनाने की तैयारी कर रहे थे। चिकन दुकान की तलाश में वे गांव की ओर आए, जहां उनकी मुलाकात बच्ची से हुई। बच्ची उन्हें चिकन दुकान तक ले गई और बाद में उनके साथ खाना खाने की जिद करने लगी। ट्रक चालकों ने पास में ही भोजन बनाकर बच्ची को भी खाना खिलाया।

रात अधिक हो जाने और घर पहुंचने पर डांट पड़ने के डर से बच्ची घबरा गई। घर लौटने पर जब परिजनों और आसपास के लोगों ने पूछताछ की तो उसने घबराहट में खुद के अपहरण की झूठी कहानी सुना दी, जो बाद में सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैल गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब मामला स्पष्ट हो गया है कि बच्ची लापता जरूर हुई थी, लेकिन अपहरण की घटना नहीं हुई थी। ग्रामीणों ने बच्ची के सुरक्षित मिलने पर राहत व्यक्त की है।




















