चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर बालोद जिले का प्रसिद्ध आस्था केंद्र झलमला स्थित मां गंगा मैया धाम इन दिनों भक्ति और श्रद्धा का विराट संगम बना हुआ है। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगना शुरू हो जाती हैं, जो देर रात तक जारी रहती हैं। मां के जयकारों और घंटों की गूंज के बीच पूरा धाम भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आ रहा है। बीते पांच दिनों में लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां गंगा मैया के दर्शन कर चुके हैं, जबकि पंचमी के अवसर पर सोमवार को ही करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाया।

इस वर्ष नवरात्रि में एक अलग तस्वीर भी देखने को मिल रही है। वाहनों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है, वहीं आसपास के गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में लोग पैदल और स्थानीय साधनों से मंदिर पहुंच रहे हैं। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में पदयात्रियों की संख्या में भी हल्की कमी दर्ज की गई है, लेकिन आस्था का उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर मां के दरबार में पहुंच रहे हैं और धाम में भक्ति की अद्भुत ऊर्जा महसूस की जा रही है।

चैत्र नवरात्रि महोत्सव की शुरुआत 19 मार्च को 1300 ज्योति कलश स्थापना के साथ हुई थी। मंदिर ट्रस्ट द्वारा 26 मार्च को दोपहर 1 बजे हवन अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा, जबकि महाअष्टमी के दिन शाम 4 बजे से कन्याभोज कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। इसके अगले दिन 27 मार्च को शाम 4:30 बजे कलश विसर्जन की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो नवरात्रि उत्सव का प्रमुख आकर्षण मानी जा रही है।

पंचमी के अवसर पर जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में माता का विशेष श्रृंगार किया गया और श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर ज्योति कलश अर्पित किए। मंदिरों में नवरात्रि को लेकर पहले से की गई व्यवस्थाओं के चलते दर्शन व्यवस्था सुव्यवस्थित बनी हुई है।

नवरात्रि पर्व के कारण गंगा मैया मंदिर परिसर में सजे धार्मिक मेले ने श्रद्धालुओं के उत्साह को और बढ़ा दिया है। माता के दर्शन के बाद दूर-दराज से आए भक्त मेले का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। मंदिर परिसर के आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। सुबह से देर रात तक चल रहे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिल रही है, जिससे पूरा झलमला धाम इन दिनों आस्था, उत्सव और भक्ति का जीवंत प्रतीक बन गया है।
अगर कहें कि इस नवरात्रि में झलमला धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा का महासंगम बन गया है, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी।




















