
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में कहा कि सांसदों के साथ आत्मीय मुलाकात के दौरान प्रदेश के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को विकास की नई गति देने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है।
इधर, PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि इस बैठक में मुख्यमंत्री ने सांसदों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर आने वाले करीब 22 हजार करोड़ रुपये के खर्च में छूट दिलाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने का अनुरोध किया। बैज ने कहा कि यह स्थिति बताती है कि डबल इंजन सरकार के बावजूद राज्य सरकार को अपने ही केंद्र से राहत के लिए “मिन्नतें” करनी पड़ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद से निपटना केंद्र और राज्य दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है, लेकिन केंद्र द्वारा सुरक्षा बल तैनात कर उसका वित्तीय बोझ राज्य पर डालना अन्यायपूर्ण है। बैज ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के बजट में इस मद के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आती है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस राशि को माफ करे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में विकास संवाद बनाम वित्तीय दबाव का मुद्दा गरमा गया है। एक ओर सरकार इसे विकास के लिए सकारात्मक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे डबल इंजन मॉडल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मौका बना रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर संसद तक राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।




















