
जानकारी के अनुसार, राजधानी दिल्ली के 9, रफी मार्ग स्थित यूएनआई परिसर में अचानक सरकारी अधिकारियों, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लगभग 300 जवानों के साथ प्रवेश कर कर्मचारियों को तत्काल न्यूजरूम खाली करने के लिए दबाव बनाया गया। कर्मचारियों ने प्रबंधन के आने तक समय देने और कार्रवाई से संबंधित लिखित आदेश दिखाने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर कोई स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
बताया गया कि इस दौरान महिला कर्मचारियों सहित कई पत्रकारों को उनकी सीटों से जबरन हटाया गया, धक्का-मुक्की और गाली-गलौच की भी शिकायत सामने आई है। परिसर के मुख्य द्वार पर सुरक्षा बलों ने कब्जा कर लिया, जिससे बाहर गए पत्रकार और प्रबंधन के अधिकारी भी अंदर प्रवेश नहीं कर सके। कई कर्मचारी अपने व्यक्तिगत सामान तक नहीं ले पाए।

यूएनआई का इस परिसर से पिछले कई दशकों से संचालन हो रहा था। अचानक इस कार्रवाई के चलते एजेंसी की अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू सेवाओं के 500 से अधिक सब्सक्राइबरों तक समाचारों का प्रेषण बाधित हो गया, जिससे संस्था के भविष्य और सैकड़ों कर्मचारियों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इस घटनाक्रम पर देशभर के पत्रकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विभिन्न राज्यों के प्रेस क्लबों ने संयुक्त रूप से घटना की निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों को बिना पूर्व सूचना और उचित प्रक्रिया के कार्यस्थल से हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

इसी कड़ी में जिला प्रेस क्लब बालोद ने भी घटना की निंदा प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया है। क्लब के पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकारों के अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से शिकायत पत्र सौंपा जाएगा।
पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्र भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई से पत्रकारों के मनोबल और संस्थागत विश्वसनीयता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।




















