ईदगाह में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। इस अवसर पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में खास उत्साह देखने को मिला। सभी नए वस्त्र पहनकर ईदगाह पहुंचे और त्योहार की खुशियों में शामिल हुए।

जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शकील चिस्ती ने अपने बयान में कहा कि ईद केवल खुशियां मनाने का त्योहार नहीं, बल्कि अमीर-गरीब, यतीम, अपाहिज और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का भी संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गरीबों, बेवाओं और असहाय लोगों की मदद करना ही ईद की असली भावना है। यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति त्योहार की खुशियों से वंचित है तो सक्षम लोगों को आगे बढ़कर उसकी सहायता करनी चाहिए।
उन्होंने पैगम्बर साहब के संदेश को याद करते हुए कहा कि मिल-जुलकर खुशी मनाना, दिलों में बसी नफरत और हसद को खत्म करना तथा आपसी भाईचारा बढ़ाना ही सच्ची ईद है। रमजान के रोजे अल्लाह की बारगाह में सबसे बड़ा तोहफा होते हैं, जिन्हें पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए।

ईद की नमाज से पहले भी जरूरतमंदों की सहायता करने का संदेश दिया गया, ताकि हर व्यक्ति इस पर्व की खुशी में शामिल हो सके। नमाज के बाद प्रदेश और देश में अमन-चैन, तरक्की और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं की गईं। इसके पश्चात लोगों ने कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूमों की मगफिरत के लिए भी दुआ मांगी।
“मीठी ईद” के नाम से प्रसिद्ध इस त्योहार पर इंतजामिया कमेटी के शाहिद खान ने मुस्लिम समाज को बधाई देते हुए कमेटी द्वारा किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन और नगरपालिका के सहयोग के लिए आभार भी जताया।




















