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दुर्ग-बलरामपुर के बाद रायगढ़ में अफीम खेती का मुद्दा गरमाया, कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कथित अफीम खेती के मुद्दे पर सियासत तेज होती जा रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि दुर्ग और बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र अंतर्गत आमघाट गांव में भी अफीम की खेती का मामला सामने आया है, जो बिना सरकारी संरक्षण के संभव नहीं हो सकता।
दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मादक पदार्थ अफीम की खुलेआम खेती होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो मामले सामने आ रहे हैं, वे सरकार की कार्रवाई से नहीं बल्कि जनजागरूकता के कारण उजागर हो रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि अफीम की खेती करने वालों को सत्ता पक्ष का संरक्षण प्राप्त है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य में अफीम खेती के मामलों की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि बिना प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर नशे का कारोबार संभव नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दुर्ग में सामने आए मामले में आरोपी विनायक ताम्रकार को केवल निलंबित क्यों किया गया, उसे पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं किया गया और पुलिस ने उसे मुख्य अभियुक्त क्यों नहीं बनाया।
बलरामपुर के मामले का जिक्र करते हुए बैज ने कहा कि जिस जमीन पर अफीम की खेती होने की बात सामने आई, वहां गिरदावरी रिकॉर्ड में दूसरी फसल दर्ज थी। उनके मुताबिक इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय प्रशासन को वास्तविक स्थिति की जानकारी थी, फिर भी कार्रवाई नहीं की गई।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि दुर्ग में अफीम खेती के कथित सरगना विनायक ताम्रकार के भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से संबंध थे और विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों में उसकी सक्रिय मौजूदगी रही है। कांग्रेस का दावा है कि यह पूरा मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक संरक्षण की आशंका है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब यह जानना चाहती है कि इस अवैध कारोबार को किन-किन लोगों का समर्थन प्राप्त था और सरकार इस पर स्पष्ट जवाब दे।

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