ज्ञापन में कहा गया कि राज्यभर में लगातार गिरता भू-जल स्तर चिंता का विषय है। हमारे पूर्वजों द्वारा निर्मित कुएं वर्षा जल संचयन का प्रभावी माध्यम रहे हैं और जल संरक्षण की पारंपरिक व्यवस्था का मजबूत आधार हैं। साफ-सफाई और संरक्षण के अभाव में ये ऐतिहासिक कुएं अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर से वंचित हो सकती हैं।
भोज कुमार साहू ने सुझाव दिया कि राज्य स्तर पर अभियान चलाकर इन कुओं की साफ-सफाई, मरम्मत और रंग-रोगन कराया जाए, ताकि उन्हें पुनर्जीवित कर जल संरक्षण की दिशा में उपयोगी बनाया जा सके।

राज्यपाल ने विषय की गंभीरता को देखते हुए ज्ञापन को मुख्य सचिव के संज्ञान में भेजते हुए आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए। इसे जल संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर बालोद जिले के पत्रकार दरवेश आनंद और धमतरी के शिक्षक अरविंद शर्मा भी उपस्थित रहे।
जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने की दिशा में यह पहल प्रदेश में जन-जागरूकता बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश मानी जा रही




















