
भाजपा का पक्ष: “संकल्प से सिद्धि तक”
प्रदेश भाजपा महामंत्री यशवंत जैन ने कहा कि सरकार के पहले दो बजट ‘ज्ञान’ (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) और ‘गति’ (गुड गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल ग्रोथ) पर आधारित थे, जबकि इस वर्ष का बजट ‘संकल्प’ की थीम पर केंद्रित है। उनके अनुसार यह बजट केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का रोडमैप है।

छत्तीसगढ़ वनोपज संघ के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) यज्ञदत्त शर्मा ने इसे “विकसित छत्तीसगढ़” के विजन डॉक्यूमेंट की दिशा में ठोस कदम बताया। उन्होंने बजट में शामिल पांच नए मिशनों को संतुलित आर्थिक विस्तार, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक संरक्षण की दृष्टि से अहम बताया।

प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि बजट में अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी, नए औद्योगिक पार्क, लैंड बैंक योजना, बस्तर-सरगुजा में औद्योगिक विकास, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0, सिरपुर विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिक विभाग में नई ओएंडएम नीति, जिला- ब्लॉक मुख्यालयों में आवास निर्माण, अतिरिक्त पोषण सहायता और जनजातीय लोक संगीत संरक्षण के लिए स्टूडियो जैसी घोषणाएं राज्य की दीर्घकालिक प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि यह बजट 3 करोड़ जनता के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को समर्पित है। उन्होंने “SANKALP” को बजट का मूल मंत्र बताते हुए इसके अक्षरों का अर्थ—
S- समावेशी विकास
A- अधोसंरचना
N- निवेश
K- कुशल मानव संसाधन
A- अंत्योदय
L- आजीविका
P- पॉलिसी से परिणाम तक— बताया।

पूर्व विधायक प्रीतम साहू ने ‘महतारी वंदन योजना’ के लिए 8200 करोड़ के प्रावधान को महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि पूर्व विधायक वीरेंद्र साहू ने प्रधानमंत्री आवास योजना (4000 करोड़) और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना (1500 करोड़) को जनकल्याणकारी बताया।
कृषि क्षेत्र में ‘कृषि उन्नत योजना’ के तहत 10,000 करोड़, 5 एचपी तक के पंपों के लिए मुफ्त बिजली (5500 करोड़), एकल बत्ती कनेक्शन (354 करोड़) और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक आधा बिल (800 करोड़) सहित कुल 6700 करोड़ के प्रावधान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती से जोड़ा गया।

पूर्व जिला अध्यक्ष कृष्णकांत पंवार, पवन साहू और वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि बजट 2026-27 छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला दूरदर्शी दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि पांच मुख्यमंत्री मिशनों के माध्यम से चिन्हित क्षेत्रों में मिशन मोड पर कार्य होगा, जिससे खेल, युवा प्रतिभा और आधारभूत संरचना को नई दिशा मिलेगी।
नेताओं ने कृषि उन्नत योजना, किसानों को रियायती व मुफ्त बिजली, ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ीकरण और निवेश को प्रोत्साहन जैसे प्रावधानों को सराहनीय बताया। उनका कहना है कि यह बजट समावेशी विकास, क्षेत्रीय संतुलन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा “संकल्प से परिणाम” की दिशा में ठोस कदम है।

कांग्रेस का हमला: “जमीनी सच्चाई से कोसों दूर”
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चन्द्रेश हिरवानी ने बजट को “संकट का बजट” बताते हुए कहा कि सरकार नकद सहायता के प्रलोभन से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से ध्यान भटका रही है। उन्होंने कृषि उन्नति योजना के प्रावधान को अपर्याप्त बताते हुए खाद-बीज की बढ़ती कीमत और सिंचाई संकट पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया।

बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने इसे “काल्पनिक बजट” बताते हुए कहा कि महिला सुरक्षा, रोजगार और रानी दुर्गावती योजना को लेकर स्पष्टता नहीं है। उन्होंने बस्तर की वनोपज संग्रहण से जुड़ी महिलाओं के लिए ठोस प्रावधान न होने पर भी आपत्ति जताई।

कर्मचारियों और शिक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
शालेय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने शासकीय सेवकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा का स्वागत किया, पर नियम-शर्तें स्पष्ट होने के बाद ही विस्तृत प्रतिक्रिया देने की बात कही।
उन्होंने एलबी संवर्ग की पूर्व सेवा गणना, महंगाई भत्ते की समान तिथि से स्वीकृति और आठवें वेतनमान को लेकर स्पष्ट घोषणा न होने पर निराशा जताई। साथ ही जर्जर स्कूल भवनों के निर्माण को सराहनीय बताया, पर भ्रष्टाचार से बचाव की मांग की।
“दृष्टि बनाम विश्वसनीयता की परीक्षा”
बजट 2026-27 स्पष्ट रूप से दीर्घकालिक विजन ‘अंजोर 2047’ की रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जिसमें अधोसंरचना, औद्योगिक निवेश, सामाजिक योजनाएं और सांस्कृतिक संरक्षण को संतुलित रूप से साधने की कोशिश दिखाई देती है। भाजपा इसे संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ता कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस इसकी विश्वसनीयता और क्रियान्वयन क्षमता पर सवाल उठा रही है।
आगामी महीनों में असली परीक्षा इस बात की होगी कि घोषित मिशन और प्रावधान जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू होते हैं। फिलहाल बजट ने प्रदेश की राजनीति में वैचारिक बहस को तेज कर दिया है—एक पक्ष इसे विकास का खाका बता रहा है, तो दूसरा इसे चुनावी पैकेजिंग।




















