सम्मेलन में समाज की नियमावली, पारंपरिक मूल्यों की रक्षा तथा नैतिक मर्यादाओं के पालन पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उपस्थित महिलाओं ने सर्वसम्मति से समाज के निर्णयों का समर्थन करते हुए कहा कि ये नियम समाज की गरिमा, अनुशासन और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
विवाह पूर्व मोबाइल बातचीत पर प्रतिबंध
सम्मेलन में एक अहम निर्णय लेते हुए तय किया गया कि सगाई के बाद विवाह संपन्न होने तक वर-वधू के बीच मोबाइल फोन पर अनावश्यक बातचीत पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। समाज ने इसे पारिवारिक संस्कार, सामाजिक मर्यादा और शालीनता की दृष्टि से आवश्यक कदम बताया। उपस्थित महिलाओं ने इसे नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की दिशा में सार्थक पहल बताया।
धर्मांतरण पर सख्त रुख
सम्मेलन में धर्मांतरण के मुद्दे पर भी गंभीर चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि यदि समाज का कोई सदस्य धर्मांतरण या उसके प्रयास में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध समाज स्तर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि यह कदम समाज की एकता, आस्था और परंपराओं की रक्षा के लिए आवश्यक है।
माहुल (सिहरी) पत्तों की थालियों में ही परोसा जाएगा भोजन
स्वदेशी परंपरा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए समाज ने निर्णय लिया कि अब से सभी सामाजिक कार्यक्रमों में भोजन माहुल (सिहरी) के पत्तों से बनी थालियों में ही परोसा जाएगा। सम्मेलन के दौरान भी इसी परंपरा का पालन करते हुए भोजन की व्यवस्था की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी है। यह निर्णय स्वदेशी जीवनशैली, स्वास्थ्य संरक्षण और प्रकृति-सम्मत जीवन का सशक्त संदेश देता है।

महिलाओं को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान समाज के विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली महिलाओं को शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा, “महिलाएं समाज की धुरी हैं; उनके सहयोग, नेतृत्व और सहभागिता से ही समाज संगठित और सशक्त बनता है।”
सामाजिक मुद्दों पर सार्थक विमर्श
सम्मेलन में शिक्षा, नशामुक्ति, युवाओं के मार्गदर्शन, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक एकता जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने अनुशासन और परंपरा के पालन को समाज की प्रगति का मूल मंत्र बताया। कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, अनुशासन और उन्नति के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
ये रहे प्रमुख पदाधिकारी व गणमान्य उपस्थित
कार्यक्रम में संतोष कौशिक (जिला अध्यक्ष, सेन समाज बालोद), सेतुराम शांडिल्य (ब्लॉक अध्यक्ष), निशा श्रीवास (जिला अध्यक्ष, सेन समाज महिला प्रकोष्ठ राजनांदगांव), ममता सेन (जनपद सदस्य, गुंडरदेही), संतोषी श्रीवास (पूर्व जनपद सदस्य, बालोद), लोकेश कौशिक (उपाध्यक्ष), जगन कौशिक (संरक्षक), उमेश कुमार सेन (जिला मीडिया प्रभारी), बालेश्वर भारद्वाज (ब्लॉक उपाध्यक्ष), जनक कौशिक (सचिव), दिलीप कौशिक (कोषाध्यक्ष), मुकेश कौशिक (संगठन मंत्री) सहित सभी बालोद इकाई अध्यक्ष, मस्तराम शांडिल्य, उत्तम सेन, प्रकाश सेन, भुवन सेन, तामेश्वर भारद्वाज, मुकेश भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि परंपरा, अनुशासन और सामाजिक एकजुटता का सशक्त संदेश बनकर सामने आया।




















