आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य उन परिवारों को उनके “मूल धर्म और परंपरा” से जोड़ना था, जो पिछले कुछ वर्षों में अन्य धर्मों में चले गए थे। मंच से बताया गया कि अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में 1 लाख 53 हजार से अधिक परिवारों की घर-वापसी कराई जा चुकी है। दो दिन पूर्व गोवा में भी 300 परिवारों की वापसी का दावा किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पहले ईसाई धर्म अपना चुके थे, लेकिन शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म में लौटे हैं। इसी तरह मोहला के एक व्यक्ति ने कहा कि लगभग दो वर्षों तक वे ईसाई धर्म में रहे, परंतु इस आयोजन में शामिल होकर फिर से हिंदू धर्म स्वीकार किया।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि यह अभियान वैदिक सनातन परंपरा के अनुसार विधि-विधान से संचालित किया जाता है। उनके अनुसार, यह केवल धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि लोगों को उनकी सांस्कृतिक पहचान और जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में अज्ञानता और गरीबी का लाभ उठाकर धर्मांतरण किए जाते हैं, इसलिए जागरूकता आवश्यक है।

कार्यक्रम में कोटा विधायक प्रबल प्रताप जूदेव भी मौजूद रहे। उन्होंने इसे धर्मांतरण के खिलाफ “निर्णायक पहल” बताते हुए कहा कि घर-वापसी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, समाज को अपनी परंपराओं और मूल्यों से जोड़े रखना राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है।

अंबागढ़ चौकी में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा रही। समर्थकों ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का कदम बताया, वहीं इस तरह के आयोजनों को लेकर सामाजिक और वैचारिक बहस भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की पुष्टि की गई है।




















