कार्यक्रम की शुरुआत भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। चारों संध्याओं में विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक सम्पन्न कराया गया, जिसका निर्देशन पंडित प्रकाश शर्मा ने किया। इस अवसर पर यजमान के रूप में त्रिलोक साहू सहपत्निक उपस्थित रहे और पूर्ण श्रद्धा के साथ अनुष्ठान में सहभागी बने। मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष और रामायण पाठ की मंगल ध्वनि से गुंजायमान रहा।

दो दिनों तक चले अखंड रामायण पाठ में समिति के सभी सदस्यों के परिवारों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता निभाई। भक्ति भाव से ओत-प्रोत वातावरण में रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ निरंतर जारी रहा, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
महाशिवरात्रि के अवसर पर समिति द्वारा अभिमंत्रित रुद्राक्ष का वितरण भी निर्धारित समय पर किया गया। रुद्राक्ष प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। लोगों ने इसे भगवान शिव की कृपा का प्रतीक मानकर श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।
दूसरे दिवस हवन-पूजन एवं महाप्रसादी वितरण के साथ दो दिवसीय आयोजन का विधिवत समापन हुआ। पूरे आयोजन में रामलाल तिवारी, मातेश्वर चतुर्वेदी, पी. एल. देशमुख, हंसमुख पटेल, हितेश पटेल, भरत गांधी जी, संतोष ठाकुर, अशोक देवांगन, सोहन पटेल, कैलाश नंद, शरद विभूते, त्रिलोक साहू, नारायण ठाकुर, नवीन चतुर्वेदी, राजेंद्र साहू, शशांक वैष्णव, गन्नू लाल देवांगन एवं अभिषेक शर्मा की सक्रिय भूमिका रही।
इसके साथ ही वार्ड की शिव कृपा मानस महिला मंडली की अध्यक्ष अनीता देशमुख एवं कल्याणी कौशिक सहित सभी महिला सदस्यों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिकारी पारा में आयोजित यह धार्मिक आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर गया। महाशिवरात्रि पर दो दिनों तक चले इस भव्य कार्यक्रम ने क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का संचार करते हुए श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और विश्वास की नई ऊर्जा का संचार किया।




















