इस पहल की खास बात यह रही कि कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, संयुक्त कलेक्टर मधुहर्ष, डिप्टी कलेक्टर प्राची ठाकुर सहित सभी अधिकारी एक साथ बस में सवार होकर ठेमाबुजुर्ग पहुँचे। प्रशासनिक टीम का सामूहिक रूप से गाँव पहुँचना अपने आप में जनसंदेश था—जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।

तांदुला नदी में चल रहे बोरी बंधान कार्य में अधिकारियों ने स्वयं बोरी उठाई, श्रमदान किया और ग्रामीणों के साथ मिलकर जल संवर्धन के इस प्रयास को गति दी। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ पैदल चलते हुए उन्होंने यह संदेश भी दिया कि पानी बचाने की लड़ाई में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक टीम ने ग्राम के दंतेश्वरी मंदिर पहुँचकर पूजा-अर्चना की और जिले की सुख-समृद्धि व सर्वांगीण विकास की कामना की। मंदिर परिसर में साफ-सफाई कर स्वच्छता अभियान में भी भागीदारी निभाई गई।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को स्वच्छता के प्रति सजग रहने और हर वर्ष 100 घंटे—यानी हर सप्ताह दो घंटे—श्रमदान कर स्वच्छता अभियान से जुड़ने की शपथ दिलाई गई।

ग्राम ठेमाबुजुर्ग में प्रशासन और ग्रामीणों की संयुक्त पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब शासन और समाज साथ आते हैं, तो नदी भी संवरती है और संदेश भी दूर तक जाता है। नीर चेतना अभियान अब केवल योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी की मिसाल बनता दिखाई दे रहा है।




















