12 और 13 फरवरी को तुलाराम आर्य कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दुर्ग में काउंसलिंग आयोजित की गई। पहले दिन ई संवर्ग के 400 में से 131 अनुपस्थित रहे तथा 62 ने असहमति दी, जबकि 207 प्रधान पाठकों ने संस्था चयन किया। दूसरे दिन ई संवर्ग के 105 में से 14 अनुपस्थित और 10 असहमत रहे, वहीं 81 ने संस्था चयन किया। टी संवर्ग के 63 में से 4 अनुपस्थित, 12 असहमत और 47 ने पदस्थापना हेतु संस्था का चयन किया। कुल 568 प्रधान पाठकों के लिए 627 रिक्त पद प्रदर्शित किए गए थे, जिससे प्रक्रिया को पारदर्शी स्वरूप मिला।

कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चन्द्रशेखर तिवारी ने जानकारी देते हुए कहा कि संयुक्त संचालक कार्यालय ने पदोन्नति एवं काउंसलिंग की संपूर्ण प्रक्रिया समयबद्ध और सुव्यवस्थित तरीके से पूर्ण कर इतिहास रचा है। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद 31 जनवरी की स्थिति में रिक्त पदों की सूची जारी की गई। संघ के आग्रह पर पहले दिन की काउंसलिंग के बाद शेष रिक्त पदों की सूची दूसरे दिन के लिए भी जारी की गई, जो पारदर्शिता की मिसाल है। उन्होंने संयुक्त संचालक आर.एल. ठाकुर, सहायक संचालक के.के. शुक्ला तथा शाखा प्रभारी रोहित बघेल और आशीष चावरे को त्वरित और सहयोगात्मक कार्यशैली के लिए बधाई दी।
प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने नवपदस्थापित प्रधान पाठकों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे अपने-अपने विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
इस पूरी प्रक्रिया को गति देने में शालेय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। संगठन की ओर से चन्द्रशेखर तिवारी, सत्येंद्र सिंह, विष्णु शर्मा, जितेंद्र शर्मा, शिवेंद्र चन्द्रवंशी, जितेंद्र पटेल, गजराज सिंह राजपूत, विजय बेलचंदन, पवन साहू, अशोक देशमुख, तिलक सेन, विरेन्द्र पारकर, योगेन्द्र वर्मा, कृष्ण राज पांडेय, अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत, प्रताप सिंह धनकर, युवराज साहू, वेद राम जांगड़े, उमेश चंद्राकर, प्रेम साहू, तीजू राम मंडावी, योगेश साहू, रविकांत देवांगन और भूपद साहू सहित सभी पदाधिकारियों ने समन्वय स्थापित कर प्रक्रिया को सफल बनाया।
काउंसलिंग में अनुपस्थित 149 शिक्षकों के लिए 16 फरवरी 2026 को संयुक्त संचालक शिक्षा, दुर्ग संभाग के मंथन हाल में पुनः काउंसलिंग आयोजित की जाएगी।
दुर्ग संभाग की यह पहल प्रशासनिक दक्षता और संगठनात्मक सहयोग का सशक्त उदाहरण है। अब उम्मीद की जा रही है कि नवपदस्थापित प्रधान पाठक अपने विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और बेहतर प्रबंधन के नए आयाम स्थापित करेंगे।




















