निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिक्षा विभाग और संस्थान प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम निर्धारित समयावधि में पूरा कराया जाए और अध्ययन-अध्यापन की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी न आने दी जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति के बिना किसी शिक्षक का अवकाश स्वीकृत न किया जाए तथा वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही अवकाश प्रदान किया जाए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
कलेक्टर ने कक्षाओं में पहुँचकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और विषयवार पढ़ाई की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों से अब तक की पढ़ाई की स्थिति, आगामी कार्ययोजना तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों की जानकारी भी ली। इस दौरान विद्यार्थियों से भोजन, अल्पाहार और अन्य सुविधाओं के बारे में पूछताछ करते हुए उनकी रुचि के अनुसार संतुलित मेन्यू तैयार कर भोजन और अल्पाहार की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता का आधार हैं। पूरी लगन और मनोयोग से अध्ययन कर वे नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं।
निरीक्षण के दौरान बालक एवं कन्या छात्रावास का भी अवलोकन किया गया। छात्रावास के कमरों और अन्य सुविधाओं का जायजा लेते हुए विद्यार्थियों को स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने की समझाइश दी गई। साथ ही अधिकारियों को छात्रावास में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए आरओ स्थापित करने, प्रत्येक कमरे में टेबल-कुर्सी उपलब्ध कराने तथा कन्या छात्रावास में पर्याप्त सेनेटरी नेपकिन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त कोचिंग संस्थान में शिक्षकों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक मशीन लगाने के निर्देश भी दिए गए।
जिला प्रशासन की यह पहल न केवल आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के द्वार खोल रही है, बल्कि ग्रामीण अंचलों के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी पहचान बनाने का मजबूत मंच भी प्रदान कर रही है।




















