स्वाधीन जैन का कहना है कि प्रदेश के कुछ बड़े जिलों जैसे रायपुर और कोरबा में रजिस्ट्री दरों में पहले ही राहत दी जा चुकी है, लेकिन बालोद जिले में अभी भी दरें ज्यादा होने से जमीन की खरीद-बिक्री आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए जमीन ही सबसे बड़ा संसाधन और आर्थिक आधार होती है।

उन्होंने बताया कि बालोद की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती और ग्रामीण गतिविधियों पर आधारित है। ऐसे में जब जमीन खरीदना या बेचना महंगा हो जाता है तो किसानों की योजनाएं प्रभावित होती हैं और छोटे व्यापारी भी निवेश करने से पीछे हटने लगते हैं। इससे जिले के आर्थिक विकास की गति पर भी असर पड़ रहा है।
स्वाधीन जैन ने सरकार से मांग की है कि बालोद जिले में रजिस्ट्री दरों को कम कर अन्य जिलों के समान किया जाए, ताकि किसानों, ग्रामीण परिवारों और व्यापार से जुड़े लोगों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि दरों में कमी आने से जमीन के लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां मजबूत होंगी।
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस जनहित से जुड़े मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेकर बालोद जिले के लोगों को राहत देने की दिशा में कदम उठाएगी।




















