बालोद। जिले के गुरुर थाना क्षेत्र में मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधान विशेष सत्र न्यायाधीश एस.एल. नवरल की अदालत ने 47 वर्षीय आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए दंडित किया। अदालत ने दुष्कर्म के अपराध में आरोपी को आजीवन कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं अन्य धाराओं में भी आरोपी को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 200-200 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
विशेष लोक अभियोजक पुष्पदेव साहू ने बताया कि पीड़िता की बहन ने गुरुर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी बहन पिछले 18 से 20 वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ है। वह बिना बताए इधर-उधर घूमती रहती है और अक्सर रात के समय चौक-चौराहों पर ही सो जाती थी।
बताया गया कि 4 अगस्त 2024 को गांव में चर्चा फैलने पर परिजनों को घटना की जानकारी मिली कि गांव के ही एक व्यक्ति ने खेत के पास युवती के साथ दुष्कर्म किया है। इसके बाद पीड़िता की बहन उसे चौक के पास से घर लेकर आई, जहां उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे तथा शरीर पर कीचड़ लगा हुआ था। पीड़िता बोलने में असमर्थ है, लेकिन उसने इशारों के माध्यम से घटना की जानकारी दी।
मामले में पुलिस ने जांच कर साक्ष्य एकत्रित किए और आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई। न्यायालय का यह फैसला समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म करने वाले दोषी को आजीवन कारावास




















