
दोपहर में झलमला चौक से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ता और किसान शामिल हुए। प्रदर्शनकारी करीब 2 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने का प्रयास किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर झूमा-झटकी हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश से पहले ही रोक लिया। बाद में कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का धान खरीदने के बजाय उन्हें मंडियों में परेशान कर रही है। बैज ने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और जब तक प्रदेश के हर किसान का पूरा धान नहीं खरीदा जाता तथा मनरेगा का मूल नाम बहाल नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायकों अनिला भेड़िया, कुंवर सिंह निषाद और संगीता सिन्हा ने भी भाजपा सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के साथ महापुरुषों का नाम जोड़ना राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और सरकार को जनहित से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

प्रदर्शन में पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी सहित जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, ब्लॉक अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रदर्शनकारियों ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।




















