बालोद।साहस, संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल पेश करने वाली कक्षा नौवीं की छात्रा हेमाद्री चौधरी को राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025 के राज्य वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। हेमाद्री ने 2 अक्टूबर 2025 को अपनी जान की परवाह किए बिना तालाब में डूब रहे पहली कक्षा के एक स्कूली बच्चे की जान बचाकर यह साबित कर दिया कि बहादुरी उम्र की मोहताज नहीं होती।
घटना गुण्डरदेही विधानसभा अंतर्गत अर्जुन्दा से लगे ग्राम मटिया की है। 2 अक्टूबर को गांव के तालाब के पास खेलते समय कक्षा पहली का एक छात्र अचानक गहरे पानी में गिर गया और डूबने लगा। बच्चे को बचाने के लिए उसका भाई मदद की गुहार लगाता रहा। इसी दौरान एक युवक से सहायता मांगी गई, लेकिन उसने तालाब में उतरने से मना कर दिया। हालात तेजी से बिगड़ रहे थे और बच्चे की जान पर खतरा मंडरा रहा था।
ऐसे नाजुक क्षण में कक्षा नौवीं की छात्रा हेमाद्री चौधरी ने असाधारण साहस का परिचय दिया। बिना किसी हिचक और अपने जीवन की चिंता किए वह सीधे तालाब में कूद पड़ी। काफी प्रयास और संघर्ष के बाद उसने डूबते बच्चे को पकड़कर सुरक्षित बाहर निकाला। बच्चे की जान बचते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं हेमाद्री की बहादुरी की चर्चा पूरे गांव में फैल गई।
इस साहसिक कार्य के लिए हेमाद्री को पहले बाल दिवस के अवसर पर स्कूल स्तर पर सम्मानित किया गया था। अब महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने उनके इस प्रेरणादायी कार्य को मान्यता देते हुए उन्हें राज्य वीरता पुरस्कार 2025 के लिए चयनित किया है।
26 जनवरी को मिलेगा सम्मान, 25 हजार की पुरस्कार राशि
महिला एवं बाल विकास संचालनालय, नवा रायपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26 जनवरी 2026 को राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान चयनित 05 वीर बालक-बालिकाओं को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। राज्य वीरता पुरस्कार के अंतर्गत प्रत्येक चयनित बालक/बालिका को 25,000 रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया जाएगा।
पुरस्कार वितरण की तैयारियों के लिए संबंधित जिलों के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। चयनित बच्चों के लिए परेड रिहर्सल, ड्रेस, ब्लेजर, जूते-मोजे सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। 23 जनवरी 2026 को बच्चों एवं उनके परिजनों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
जिले और स्कूल के लिए गर्व
शिक्षकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हेमाद्री चौधरी का यह साहस समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि संकट के समय मानवता सबसे बड़ा धर्म होती है। छोटी उम्र में दिखाया गया यह साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। हेमाद्री चौधरी आज सिर्फ एक छात्रा नहीं, बल्कि साहस, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।




















