प्रदेश रूचि

बीच बस्ती में उसना राइस मिल का ज़हर, वार्ड 12–13 के लोग धुएं और डस्ट में घुटने को मजबूर

बालोद | नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 और 13 में संचालित उसना राइस मिल अब स्थानीय नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी और स्वास्थ्य संकट का कारण बन चुकी है। मिल से निकलने वाला काला धुआं और भूसे का बारीक डस्ट आसपास के घरों, दुकानों और होटलों तक पहुंच रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि मिल से निकलने वाला काला डस्ट बेहद हानिकारक है। यह डस्ट घरों के भीतर तक भर जाता है, छतों पर काली मोटी परत जम जाती है और खाने-पीने की वस्तुएं तक दूषित हो रही हैं। नया बस स्टैंड चौपाटी क्षेत्र, आमापारा और गंजपारा के रहवासी इस समस्या से सबसे अधिक त्रस्त हैं। होटलों में खुले रखे खाद्य पदार्थों पर काला डस्ट गिरने से ग्राहकों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।


घर में कैद होने को मजबूर लोग
वार्ड 12 और 13 के निवासी इसे “कालापानी जैसी सजा” बताते हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग न सुबह खिड़कियां खोल पा रहे हैं, न शाम को छत पर जा पा रहे हैं। महिलाएं न कपड़े सुखा पा रही हैं और न ही छत पर किसी प्रकार का खाद्य सामान रख सकती हैं। छत पर कदम रखते ही पैरों के निशान काली परत पर साफ दिखाई देते हैं, जो प्रदूषण की भयावह स्थिति को बयां करता है।

लंबे समय से शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग
स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस राइस मिल को रहवासी क्षेत्र से दूर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ठोस कार्रवाई न होने से मिल संचालकों के हौसले बुलंद हैं और नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।


नियमों के उल्लंघन का आरोप
वार्डवासियों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की आंखों के सामने पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है। मिल से निकलने वाला जहरीला धुआं और गंदा पानी आसपास की जमीन और वातावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग नहीं की जा रही।

आंदोलन की चेतावनी
लगातार अनदेखी से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वार्डवासियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है।
जनसरोकार का सवाल यह है कि घनी आबादी के बीच चल रही ऐसी इकाइयों पर कब सख्त कार्रवाई होगी और कब नागरिकों को स्वच्छ हवा व सुरक्षित वातावरण मिलेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!