इसी क्रम में हिंदू जागरण और सनातन संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से जिले में लगातार धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं, जो अब एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप लेते नजर आ रहे हैं।
हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति के नेतृत्व में बीते एक सप्ताह से बालोद जिला मुख्यालय के प्रमुख चौक–चौराहों पर प्रतिदिन भारत माता की आरती और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जा रहा है। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में सकल हिंदू समाज के लोग एकत्रित होकर भारत माता के तेलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करते हैं और भारत माता की जय व वंदे मातरम जैसे नारों के साथ धार्मिक एकता का संदेश दे रहे हैं।
धर्मांतरण को लेकर बढ़ती चिंता
स्थानीय हिंदू संगठनों का कहना है कि जिले के कुछ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में धर्मांतरण की घटनाएं सामने आने के बाद समाज में चिंता का माहौल बना हुआ है। आयोजन समिति का मानना है कि आर्थिक, सामाजिक या अन्य प्रलोभनों के कारण सनातन धर्म से दूर हो रहे लोगों को जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य से धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता पर जोर
आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह पहल किसी अन्य धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है। भारत माता की आरती और हनुमान चालीसा के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को एक मंच पर लाकर धार्मिक चेतना को जागृत किया जा रहा है।

18 जनवरी को होगा विशाल हिन्दू सम्मेलन
इसी अभियान की कड़ी में आगामी 18 जनवरी को नगर के जय स्तम्भ चौक के समीप विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन में जिले भर से साधु-संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन समिति के अनुसार सम्मेलन के माध्यम से धर्मांतरण की रोकथाम, सनातन मूल्यों का संरक्षण और सामाजिक एकजुटता जैसे विषयों पर विचार साझा किए जाएंगे।
जनभागीदारी बढ़ने से आयोजक उत्साहित
धार्मिक आयोजनों में लगातार बढ़ रही जनभागीदारी से आयोजक खासे उत्साहित हैं। स्थानीय महिलाओं और युवाओं की सक्रिय मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि समाज अब अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर अधिक सजग हो रहा है।
आगे और व्यापक स्तर पर आयोजन की तैयारी हिंदू संगठनों का कहना है कि आने वाले समय में इन आयोजनों को और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों, मंदिर परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर भी इसी तरह के धार्मिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है।
धर्मांतरण की बढ़ती चर्चाओं के बीच बालोद में शुरू हुआ यह हिंदू जागरण अभियान अब केवल धार्मिक आयोजन न रहकर सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बनता जा रहा है। अब सभी की निगाहें 18 जनवरी को होने वाले विशाल हिन्दू सम्मेलन पर टिकी हैं, जिसे जिले में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।




















