स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार की मनमानी और लापरवाही के चलते कार्य बीच में ही रोक दिया गया, जबकि नाली निर्माण के लिए विधिवत कार्यादेश जारी हो चुका था। हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही कार्य को पूरा कराने की पहल हुई। निर्माण स्थल पर कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या सुरक्षा संकेत तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे राहगीरों, बच्चों और वाहन चालकों की जान हर पल जोखिम में है।

मधु चौक क्षेत्र के व्यापारियों ने भी इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई है। स्थानीय व्यापारी उमेश कुमार सेन का कहना है कि विभाग की उदासीनता के कारण आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। अधूरी नाली न केवल व्यापार के लिए बाधा बन रही है, बल्कि इलाके की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि शहर के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले चौकों पर अधूरे निर्माण कार्य छोड़ देना जनहित के खिलाफ है। उनका सुझाव है कि तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाएं, स्थल को बैरिकेडिंग और संकेतकों से सुरक्षित किया जाए तथा निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।
यह पूरा मामला न सिर्फ ठेकेदार की मनमानी को उजागर करता है, बल्कि संबंधित विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो




















